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अपने हाथों आशियाना उजाड़ रहे: सरयू की कटान से तीन मकान नदी में समाए, 100 बीघे जमीन कटी; बढ़ी चिंता

Fri, 16 Oct 2026 05:40 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

उत्तरी दियरांचल में सरयू नदी की कटान से तबाही जारी है। नदी में तीन मकान समा गए, जबकि करीब 100 बीघे जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। गोपालनगर टांडी और शिवाल मठिया में आबादी के करीब कटान होने से ग्रामीण दहशत में हैं। नदी तटवर्ती लोग रातभर जागकर अपने आशियाने और सामान की निगरानी कर रहे हैं।
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सरयू से हो रहे कटान के बीच जुगाड़ बनाते लोग। - फोटो : संवाद
सरयू नदी की उतरती धारा से बांसडीह व बैरिया तहसील क्षेत्र में कटान हो रही है। 24 घंटे के अंदर तीन मकान नदी में समा गए। लगभग 100 बीघा जमीन कटकर बह गई। कटान तेज होने लोग रतजगा कर रहे हैं।

बैरिया के उत्तरी दियरांचल में बुधवार की रात से कटान अचानक तेज हो गई है। वशिष्ठ नगर और गोपालनगर के सिवान में 100 बीघा से ज्यादा जमीन सरयू नदी में कटकर बह गई। गोपालनगर टांडी निवासी गनेश यादव, शिवजी यादव और महेश यादव के मकान नदी में समा गए। बस्तियों के करीब कटान पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। 
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बलिया में सरयू नदी का कहर जारी। - फोटो : अमर उजाला

गोपालनगर टांडी और शिवाल मठिया में आबादी के काफी करीब कटान हो रही है। इन दोनों क्षेत्रों में लगभग 12 मकान अब भी कटान की जद में हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान की रफ्तार इसी तरह रही तो आने वाले समय में कई और मकान नदी में समा सकते हैं। ग्रामीण अपने घरों और जमीन को बचाने को लेकर चिंतित हैं। अब तक 500 एकड़ भूमि नदी में समाहित हो चूकी है।

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बलिया में सरयू नदी में समा गए कई घर। - फोटो : अमर उजाला

उधर, बांसडीह में सरयू नदी का रौद्र रूप मुसीबत बनता जा रहा है। महाराजपुर गांव के नाहरछपरा टोला कटान के मुहाने पर है। नदी और आबादी के बीच अब सिर्फ 20 मीटर का फासला बचा है। रात भर ग्रामीण टाॅर्च और लाठी लेकर नदी किनारे पहरा देते रहे। बाढ़ खंड के अभियंता मौके पर डटे हैं। बचाव के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है। नदी में बांस की बल्लियां गाड़कर जियो तिरपाल और बालू भरे जियो बैग डाले जा रहे हैं। बृहस्पतिवार की सुबह से फिर मजदूरों को लगाकर कटान रोधी कार्य तेज कर दिया गया है।

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सरयू नदी का कहर जारी। - फोटो : संवाद
अपने हाथों आशियाना उजाड़ रहे कटान पीड़ित
उधर गांव में पलायन का मंजर है। लोग अपने आशियाने को खुद उजाड़ने के लिए मजबूर हैं। पक्की दीवारों से ईंट निकालकर, चौखट-दरवाजे उखाड़कर ट्रैक्टर-ट्रॉली से दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। प्रशासन ने चितबिसांव खुर्द के विद्यालय में राहत शिविर शुरू कर दिया है। महाराजपुर के अलावा सुल्तानपुर गांव के सामने भी सरयू तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है, जिससे वहां भी दहशत का माहौल है।
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गोपालनगर टाड़ी गांव में कहर जारी। - फोटो : संवाद
जेसीबी से जल्दी-जल्दी मकान तोड़ने में जुटे पीड़ित
सरयू नदी का रौद्र रूप देख पूरे गांव में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ पानी घटाव पर है तो दूसरी तरफ कटान की रफ्तार बढ़ती जा रही है। वहीं लगभग एक दर्जन लोग अपने मकान जेसीबी लगा कर तुड़वा रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान को ले जाकर कहीं सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं।
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जमीन का कटान है जारी। - फोटो : संवाद
जब इधर कटान ने मुंह किया तो हम ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन व विभाग को अवगत कराया था। अगर विभाग इस समय बचाव कार्य में लग गया होता तो आज हम लोग बेघर नहीं होते। - रीता देवी
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सरयू नदी का जलस्तर। - फोटो : संवाद
थोड़ी बहुत जो जमीन थी, वह भी नदी में चली गई। अब ना ही जमीन बची है, ना ही घर बचा। अब हम लोग कहां जाएं, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। प्रशासन से सहायता की उम्मीद है। -आरती देवी
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बहती सरयू नदी, कटान का खतरा संवाद - फोटो : संवाद
बचाव कार्य में प्रशासन लगा है। दो सौ लोगों का दोनों शिफ्ट का भोजन भी करवाया जा रहा है। वहीं राजस्व टीम की ओर से जिन लोगों का जमीन नदी में चली गई है, उनकी सूची भी बनाई जा रही है। - नितिन कुमार सिंह, तहसीलदार, बांसडीह
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