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दिल की बात: एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट के बाद भी क्यों बढ़ा रहता है बैड कोलेस्ट्रॉल? डॉक्टर ने बताया

Mon, 28 Sep 2026 01:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Heart Day 2026: एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या युवा और फिट लोगों में भी बढ़ती देखी जा रही है। लाइफस्टाइल-खानपान में गड़बड़ी के अलावा जेनेटिक्स या फैमिली हिस्ट्री के कारण इसका स्तर ज्यादा हो सकता है। 18 साल से नियमित लिपिड प्रोफाइल जांच जरूरी है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
हृदय रोग वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। हर साल इससे संबंधित समस्याओं के कारण 1.92 से 2.05 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है। यानी दुनियाभर में होने वाली हर 3 मौतों में से लगभग 1 मौत के लिए इसे बड़ा कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, दिल की बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं, इसलिए अच्छी बात ये है कि अगर समय रहते इसके लक्षणों का पता लगा लिया जाए तो आप किसी बड़े खतरे से बच सकते हैं।

यही कारण है कि 30 से अधिक उम्र के सभी लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहना चाहिए। अगर आपका ब्लड प्रेशर ठीक है, वजन और शुगर  कंट्रोल में है तो इसे अच्छी सेहत का संकेत माना जाता है, पर जब बात दिल की सेहत की बात हो तो बस यही काफी नही है। इसके लिए आपको कोलेस्ट्रॉल खासकर एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है।

कई मामलों में देखा गया है कि भले ही आप एक्सरसाइज करते हैं और हेल्दी डाइट लेते हैं फिर भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आ सकता है, आखिर इसका क्या कारण है? क्या आप भी इस समस्या से परेशान रहते हैं? अगर हां तो आइए डॉक्टर से इस बारे में जान लेते हैं।
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कम उम्र वालों में हृदय रोग - फोटो : Freepik.com
कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने और दिल की समस्याओं को लेकर कम उम्र से ही अलर्ट रहने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को 'वर्ल्ड हार्ट डे' मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट डे 2026 का विषय है- "डॉन्ट मिस अ बीट"। इसमें दिल की बीमारी के छिपे हुए या हल्के स्तर के शुरुआती संकेतों को पहचानने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर कोई गंभीर समस्या न हो। 


स्वस्थ लोगों को भी हो सकती है बैड कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता है कि बैड कोलेस्ट्रॉल सिर्फ उम्रदराज लोगों की समस्या है या फिर यह उन लोगों में होती है जो ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना खाते हैं। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। डॉक्टर बताते हैं, भले ही आपकी उम्र कम हो, शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हों और खान-पान भी ठीक हो फिर भी एलडीएल बढ़ सकता है।
 
  • सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हाई एलडीएल अक्सर कोई साफ संकेत नहीं देता। यानी न दर्द, न कोई खास परेशानी और न ही ऐसा लक्षण, जिससे समझा जा सके कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रहा है। इसी वजह से नियमित जांच का महत्व बढ़ जाता है।
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दिल की सेहत का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
क्या कहते हैं डॉक्टर?

पुणे स्थित एक अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. समीर निगम बताते हैं, जिस तरह से कम उम्र वालों में हार्ट अटैक से मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं इसे देखते हुए अब हम लोग 18 साल की उम्र से नियमित लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। 
 
  • डॉ. समीर कहते हैं, कई मामलों में देखा गया है कि मरीज नियमित एक्सरसाइज करता है और खान-पान का भी ठीक है पर जांच में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आता है। 
  • उम्र बढ़ना और शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहना दिल की बीमारी के जाने-पहचाने जोखिम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हाई एलडीएल की समस्या सिर्फ बुजुर्गों या अस्वस्थ जीवनशैली वाले लोगों में ही होता है।
  • कम उम्र के ऐसे लोग, जिनकी दिनचर्या सक्रिय है और जो संतुलित खाना खाते हैं, उनमें जेनेटिक्स और परिवार में पहले से चली आ रही बीमारी यानी फैमिली हिस्ट्री के कारण भी एलडीएल बढ़ सकता है।

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कोलेस्ट्रॉल की जांच - फोटो : Adobe Stock
इन खतरों को देखते हुए डॉक्टर के पास जाएं तो ये 3 सवाल जरूर पूछें।

मेरा एलडीएल-सी कितना है?

एलडीएल-सी यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को आम भाषा में बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसका स्तर ज्यादा होने पर दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लाक और दूसरे पदार्थों की परत जमा हो सकती है।
 
  • सबसे बड़ी बात यह है कि एलडीएल बढ़ने पर आमतौर पर बाहर से कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में आपका एलडीएल कितना है, इसका सही नंबर जानना बहुत जरूरी है। यही आगे की देखभाल और इलाज तय करने की पहली सीढ़ी है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
मेरे लिए एलडीएल कितना होना चाहिए?

डॉ समीर बताते हैं, एलडीएल की एक ही सीमा हर व्यक्ति के लिए फिट नहीं बैठती। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया यानी सीएसआई के अनुसार, ये आपके कार्डियोवैस्कुलर रिस्क प्रोफाइल से पता चलता।
 
  • कम जोखिम: एलडीएल 116 mg/dL से कम होने चाहिए।
  • मध्यम जोखिम: एलडीएल 100 mg/dL से कम
  • ज्यादा जोखिम: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी होने पर 70 mg/dL से कम होना चाहिए।
  • बहुत ज्यादा जोखिम: पहले हार्ट अटैक हो चुका हो, स्टेंट लगा हो या बाईपास सर्जरी हुई हो, तो 55 mg/dL से कम होना चाहिए।
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हृदय रोगों के खतरे को कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
क्या मेरा एलडीएल बढ़ गया है? अगर नहीं, तो मेरे पास क्या विकल्प हैं?

सिर्फ दवा लेना या स्वस्थ खाना खाना तय नहीं करता है कि आपका एलडीएल ठीक रहेगा। 
 
  • लाइफस्टाइल और खानपान ठीक रखना सभी के लिए जरूरी है. 
  • कुछ मरीजों के लिए एडवांस्ड लिपिड-लोअरिंग ट्रीटमेंट यानी कोलेस्ट्रॉल कम करने के आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। इनमें पीसीएसके9 इनहिबिटर जैसी इंजेक्शन वाली दवाएं और एसआईआरएनए थेरेपी शामिल हैं। इनका इस्तेमाल खास तौर पर उन लोगों में किया जा सकता है जिनका दिल से जुड़ा जोखिम बहुत ज्यादा है। 

बैड कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत के लिए बड़ा खतरा है इसलिए अगर ये बढ़ा रहता है तो इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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