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Predictions: देश-दुनिया में क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं ? जानें ग्रहों के संकेत और आगे की भविष्यवाणियां

Fri, 05 Jun 2026 01:24 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Astrology Predictions On Agni Kand: देश-दुनिया में लगातार बढ़ रहे अग्निकांडों के पीछे क्या हैं ज्योतिषीय संकेत ? जानें ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव, आग की बढ़ती घटनाओं का रहस्य और आने वाले समय की बड़ी भविष्यवाणियां।
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Astrology Predictions On Agnikand - फोटो : अमर उजाला AI
Astrology Predictions On Agnikand: दिल्ली-एनसीआर, बिहार, मध्य प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों से लगातार अग्निकांड की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी घटनाएं केवल मानवीय भूल या कोई तकनीकी खामी ही नहीं, बल्कि ग्रहों की उचित स्थिति न होना भी हो सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थितियां बनती हैं, तो उनका प्रभाव केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश-दुनिया पर भी व्यापक रूप से दिखाई देता है। वर्तमान समय में ग्रहों की स्थिति और संवत्सर का प्रभाव कुछ ऐसे ही संकेत दे रहा है, जिसके कारण बार-बार आग की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिल सकती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Astrology Predictions On Agnikand - फोटो : अमर उजाला AI
आखिर क्यों देश-दुनिया में बढ़ रहे हैं अग्निकांड ?
वर्तमान में विक्रम संवत 2083 जारी है, जिसे 'रौद्र संवत्सर' के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 60 संवत्सरों का एक चक्र होता है और प्रत्येक संवत्सर का अपना अलग स्वभाव एवं प्रभाव माना जाता है। ऐसे में लगभग 60 वर्षों बाद एक बार फिर यह रौद्र संवत्सर लौटकर आया है। इसके नाम से ही इसके अर्थ और प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है।

बता दें, 'रौद्र' शब्द भगवान शिव के उग्र रुद्र स्वरूप से जुड़ा हुआ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में यह संवत्सर तेज ऊर्जा, देश-दुनिया में अचानक परिवर्तन, कार्यों के लेकर संघर्ष और कई चुनौतियों से जोड़ा जाता है। बड़ी बात यह है कि, इसके प्रभावी होने पर अग्नि तत्व से जुड़ी घटनाएं, जैसे आग लगना, विस्फोट, तापमान में असामान्य परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन अधिक देखने को मिल सकते हैं। इसलिए लगातार देश-दुनिया में अग्निकांड जैसी घटनाएं देखी जा रही हैं। 
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Astrology Predictions On Agnikand - फोटो : अमर उजाला AI
साल 2026 में राजा गुरु और मंत्री मंगल बना रहे हैं विशेष संयोग
साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 के देवगुरु बृहस्पति राजा है और इसके मंत्री मंगल है, जिन्हें अग्नि, दुर्घटना व युद्ध का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं बृहस्पति वर्तमान समय में अतिचारी अवस्था में हैं, जिसे कई ज्योतिषी वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और बड़े परिवर्तनों का संकेत मानते हैं। साथ ही गुरु जैसे शुभ ग्रह का अतिचारी होना उसके शुभ प्रभाव को कम करता है।

माना जाता है कि, जब मंगल की ऊर्जा अधिक सक्रिय हो और गुरु जैसे बड़े ग्रह की शुभता कमजोर हो, तो देश-दुनिया में अग्निकांड, दुर्घटनाएं- तनाव और प्राकृतिक असंतुलन जैसी घटनाएं सामने आती हैं। यही कारण है कि, साल 2026 में मौसम के मिजाज में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है और देश के कौने-कौने से अग्निकांड जैसी खबरें सामने आ रही हैं।

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Astrology Predictions On Agnikand - फोटो : अमर उजाला AI
आने वाले महीनों में बरतनी होगी अधिक सावधानी
2026 का आधा समय बीत चुका है और साल खत्म होने में कुछ महीने और बाकी हैं। ऐसे में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता रहेगी। ग्रह-नक्षत्रों की चाल की गणना के मुताबिक, इस समय बिजली उपकरणों, गैस और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना होगा। छोटी सी लापरवाही किसी घटना में बदल सकती हैं। 
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विज्ञान, डिजिटल तकनीक और  AI के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति देखने को मिल सकती है। ऐसा कहा जा सकता है कि, आने वाले समय में भारत समेत कई देश AI उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेंगे। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
भविष्यवाणी- विज्ञान और AI का बढ़ेगा प्रभाव
रौद्र संवत्सर केवल चुनौतियों की ओर ही इशारा ही नहीं करता, बल्कि यह देश-दुनिया के कई बड़े बदलावों का भी संकेत देता है। इस समय कई नई तकनीकों का भी उदय हो सकता है। अब चूंकि इस साल के मंत्री मंगल है, जिन्हें तकनीकी से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में विज्ञान, डिजिटल तकनीक और  AI के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति देखने को मिल सकती है। ऐसा कहा जा सकता है कि, आने वाले समय में भारत समेत कई देशों में AI प्रभाव तेजी से आगे बढ़ेगा। इसलिए यह समय जहां चुनौतियों का संकेत दे रहा है, तो वहीं दूसरी ओर यह एक नए युग की तकनीक की ओर भी इशारा करता है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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