जिले के चर्चित जमीन सौदा मामले में गिरफ्तारी वारंट को लेकर अब जिला न्यायालय के आदेश से नया मोड़ सामने आया है। जिस मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत 3 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किए गए थे, वही वारंट अब कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा (जैन) तिवारी की अदालत ने कहा कि एसआईटी जबलपुर ने पहले खारिज हो चुके आवेदनों की जानकारी सामने रखे बिना वारंट जारी करने की मांग की। कोर्ट ने इस पर एसआईटी निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस के निर्देश देते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?
पहले सत्र न्यायालय में खारिज हो चुके थे आवेदन
अदालत के आदेश के अनुसार आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी कराने के लिए एसआईटी जबलपुर ने 1 सितंबर को सत्र न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। सत्र न्यायालय ने 2 सितंबर को इस आवेदन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद फरियादी पक्ष की ओर से भी गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे 16 सितंबर को सत्र न्यायालय ने निरस्त कर दिया। इसके बावजूद बाद में गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। अदालत ने कहा कि इन पूर्व आदेशों की जानकारी छिपाते हुए एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक की ओर से वारंट जारी करने के लिए आवेदन किया गया था।
ये भी पढ़ें: एमपी स्वामित्व योजना: मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर नया प्लान, पटवारी पदेन रहेगा; विवाद होने पर राज्य सरकार लड़ेगी
क्षेत्राधिकार को लेकर अदालत ने किया स्पष्ट
जिला न्यायालय के अनुसार जब सत्र न्यायालय इसी अपराध में गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए प्रस्तुत आवेदन को पहले ही निरस्त कर चुका था, तो उसके बाद इस अदालत के पास गिरफ्तारी वारंट जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं रह गया था। इसी आधार पर जिला न्यायालय ने 18 सितंबर को जारी तीनों गिरफ्तारी वारंट निरस्त करते हुए उन्हें वापस लौटाने के निर्देश दिए। ये वारंट निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिजराज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ जारी किए गए थे।
SIT निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस
वहीं जिला कोर्ट ने एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि न्यायालय को मामले के पूर्व आदेशों और संबंधित तथ्यों से अवगत नहीं कराने तथा जानकारी छिपाकर गिरफ्तारी वारंट जारी कराने के संबंध में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? वहीं जिला न्यायालय ने इस मामले की जानकारी संबंधित वरिष्ठ अधिकारी और उच्च न्यायालय को भी देने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की पत्रावली आगामी कार्रवाई के लिए 25 सितंबर को अदालत के समक्ष पेश की जाएगी।