हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान नोटिस जारी होने के बावजूद आदेश पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 1 अक्तूबर को न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं। एकलपीठ ने वारंट की तामील आईजी जबलपुर के माध्यम से कराने के भी निर्देश दिए हैं।
सुहागी, जबलपुर निवासी सीता तिवारी की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि उनके पति संतोष पांडे छिंदवाड़ा में पुलिसकर्मी के पद पर पदस्थ थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनका निधन हो गया था। इसके बाद विभाग की ओर से उनके खिलाफ 2 लाख 24 हजार रुपये की रिकवरी निकाली गई थी। इसके विरुद्ध सीता तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उनके पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किए थे।
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एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि 6 नवंबर 2025 को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अब तक आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई थी। छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक की ओर से 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अवर सचिव, वल्लभ भवन भोपाल को पत्र लिखा गया था। पत्र में बताया गया था कि अवमानना याचिका का नोटिस प्राप्त हो चुका है और स्वीकृति के लिए गृह विभाग को पत्र भेजा गया है। इससे स्पष्ट है कि पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारी अवमानना प्रकरण के लंबित होने से परिचित थे। इसके बावजूद रजिस्ट्रार को केवल नोटिस प्राप्त होने की सूचना देना ही पर्याप्त समझा गया।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अधिकारियों को अधिवक्ता नियुक्त कर न्यायालय के समक्ष आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए थी। आदेश का पालन नहीं करना और नोटिस मिलने के बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं होना गंभीर स्थिति है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाते हुए छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने छिंदवाड़ा एसपी को 1 अक्तूबर को न्यायालय के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वारंट की तामील आईजी जबलपुर के माध्यम से कराने के आदेश दिए गए हैं।