दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार हुई और नौ यात्रियों की जान चली गई। बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे। बस अनफिट थी और इंश्योरेंस भी नहीं था। इसके बावजूद एक के बाद एक आरटीओ क्षेत्रों से गुजरते हुए बस का संचालन हो रहा था। ऐसी बसें खुलेआम हादसों को अंजाम दे रही हैं।
बिहार से पंजाब, दिल्ली, राजस्थान आदि जगहों के लिए लंबी दूरी की बसें सिंगल ड्राइवर के भरोसे चलाई जाती हैं, जबकि इनमें डबल ड्राइवर होने चाहिए। बसें पूरी रात चलती हैं। कई बार एक झपकी आने पर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन बस ऑपरेटर सिर्फ कमाई पर फोकस करते हैं। लीपर बसों में सुरक्षा के लिहाज से तमाम निर्देश जारी हो चुके हैं, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर उनका पालन नहीं करवा पाए हैं। मसलन, स्लीपर कोच में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम डिवाइस (एफडीएसएस) लगाई जाए। बसों में 10 किलोग्राम के अग्निशमन यंत्र है।
बसों के परमिट, फिटनेस आदि में परिवहन विभाग के अफसर लापरवाह रवैया अपनाते हैं। ऐसे ही गोरखपुर के एक मोटर कोकल इंस्पेक्टर पर गाज गिर चुकी है, जिन्होंने अनफिट बस को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया था। प्राइवेट फिटनेस सेंटर एटीएस भी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।