मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। झारखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा आरोप पत्र में दर्ज राशि में किए गए बदलाव को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने बुधवार को इस मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के साथ ही आरोप पत्र में दर्ज राशि के संशोधन से जुड़ी कानूनी लड़ाई में पूर्व मुख्यमंत्री को राहत नहीं मिल सकी।
उच्च न्यायालय में सुनवाई और फैसला
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दाखिल आरोप पत्र में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग राशि में संशोधन का मामला अदालत के समक्ष लंबे समय से विचाराधीन था। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की याचिका पर उच्च न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बहस पूरी हो चुकी थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और कानूनी पहलुओं को सुनने के बाद इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बुधवार को न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने सुरक्षित फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। फैसले के आते ही उच्च न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र में दर्ज राशि के बदलाव से संबंधित याचिका पर चल रही कानूनी कार्यवाही भी खत्म हो गई। उच्च न्यायालय के निर्णय को पूर्व मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वे आरोप पत्र में दर्ज राशि के संशोधन पर लगातार आपत्ति दर्ज करा रहे थे।
प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष और दलीलें
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की याचिका का पुरजोर विरोध किया था। जांच एजेंसी की ओर से अदालत में विस्तृत जवाब दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप पत्र में दर्ज की गई राशि और उसमें समय-समय पर हुए संशोधनों से जुड़े तथ्य और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। उच्च न्यायालय में जांच एजेंसी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा।
दोनों अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने प्रवर्तन निदेशालय के जवाब और मामले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोप पत्र में राशि का संशोधन नियमानुसार और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर किया गया है। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तर्कों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अंततः खारिज करने के रूप में सुनाया गया।
निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक का सफर
कानूनी विवाद की शुरुआत निचली अदालत से हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दाखिल आरोप पत्र की राशि में बदलाव के खिलाफ सबसे पहले निचली अदालत का रुख किया था। उन्होंने निचली अदालत के समक्ष याचिका दायर कर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राशि में किए गए संशोधनों पर अपनी गंभीर आपत्ति जताई थी। हालांकि, निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिका को खारिज कर दिया था और उन्हें कोई राहत नहीं दी थी।
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निचली अदालत के इस आदेश से असंतुष्ट होकर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। याचिका में यह आग्रह किया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय की आरोप पत्र में दर्ज राशि में बदलाव को लेकर उनकी आपत्ति पर पुनर्विचार किया जाए और राहत प्रदान की जाए। लेकिन उच्च न्यायालय ने भी निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस तरह निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक पूर्व मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर कोई कानूनी राहत हासिल नहीं हो सकी।