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जम्मू-कश्मीर के नशामुक्ति केंद्रों में ही गड़बड़ी: डॉक्टर लापता, दवाइयों का अवैध कारोबार; ढेर सारे सवाल

Fri, 23 Oct 2026 04:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा गौरव रावत, जम्मू

सार

कहीं डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नियंत्रित दवाएं बेची जा रही हैं, तो कुछ डॉक्टर की विशेषज्ञ योग्यता और केंद्र के पंजीकरण को लेकर गड़बड़ी मिली है।
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए मरीज और उनके परिवार नशामुक्ति केंद्रों पर भरोसा करते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इन्हीं केंद्रों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। कहीं डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नियंत्रित दवाएं बेची जा रही हैं, तो कुछ डॉक्टर की विशेषज्ञ योग्यता और केंद्र के पंजीकरण को लेकर गड़बड़ी मिली है। एक केंद्र में तो पांच दिन में 38,580 गोलियों की बिक्री दर्ज की गई। मेडिकल काउंसिल ने जुलाई से अब तक सात मनोचिकित्सकों की अनुमति रद्द की है और 10 से ज्यादा केंद्रों को सील किया है।

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सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला कुंजवानी बाईपास स्थित जम्मू साइकियाट्रिक क्लीनिक का है। यहां 22 से 26 मई के बीच ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की कुल 38,580 गोलियों की बिक्री दर्ज की गई। इनमें 25 मई को ही 10,120 गोलियों की बिक्री का रिकॉर्ड मिला।

इसका इस्तेमाल नशे की लत के इलाज में किया जाता है। यहां मनोचिकित्सक डॉ. खुशबू हर्ष चौहान को प्रदेश में इलाज करने की अनुमति भी रद्द कर दी गई। इस क्लिनिक में सितंबर 2025 से 2026 के बीच एक ही दवा आपूर्तिकर्ता से ब्यूप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन की करीब 25 लाख गोलियां खरीदने और बांटे जाने का रिकॉर्ड मिला।
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डॉक्टर अनुपस्थित, दूसरा बेच रहा था दवाएं
कठुआ के कालीबाड़ी स्थित एएएस क्लीनिक की 12 सितंबर 2023 को जांच की गई थी। उस समय क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर डॉ. सुमीत सिंह मौके पर मौजूद नहीं थे। टीम को इंदरजीत सिंह नाम का व्यक्ति नियंत्रित दवाएं बेचता मिला। इस मामले में 6 जुलाई 2026 डॉ. सुमीत सिंह की अनुमति रद्द कर दी गई।

वेव मॉल के केंद्र में 36 हजार गोलियों का रिकॉर्ड, डॉक्टर की योग्यता पर सवाल
जम्मू के वेव मॉल स्थित डिवाइन डी-एडिक्शन सेंटर से जुड़े मामले में डॉ. सैयद मतीन की विशेषज्ञता और दवाओं की बिक्री पर सवाल उठे। 30 जून 2025 के एक बिल में डॉ. मतीन के पंजीकरण नंबर पर ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की 36,000 गोलियों की खरीद दर्ज थी। डॉ. मतीन ने खुद को मनोचिकित्सक बताया था। लेकिन काउंसिल के रिकॉर्ड में मनोचिकित्सा की विशेषज्ञता से जुड़ी उनकी योग्यता दर्ज नहीं थी।
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