एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल की चुनाव जीत को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मालेगांव सेंट्रल सीट से एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खलीक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिकाएं गुरुवार को खारिज कर दीं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 जून के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने खलीक के निर्वाचन के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नवंबर 2024 में हुए थे। मालेगांव सेंट्रल सीट से मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खलीक ने 162 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। चुनाव हारने वाले एक उम्मीदवार ने उनके निर्वाचन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि खलीक ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत परिभाषित ‘भ्रष्ट आचरण’ किया। चुनाव याचिका में दावा किया गया था कि खलीक धार्मिक नेता हैं और उन्होंने मतदाताओं के बीच धार्मिक प्रभाव का इस्तेमाल किया। आरोप था कि मतदाताओं को ‘ईश्वरीय नाराजगी या आध्यात्मिक निंदा’ के डर के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि महिलाओं को लेकर पर्चे बांटकर मतदाताओं को प्रभावित किया गया। इन पर्चों में कथित तौर पर कहा गया था कि जो लोग किसी महिला को अपना नेता चुनेंगे, वे कभी तरक्की नहीं कर सकते। चुनाव में दो महिला उम्मीदवार भी मैदान में थीं। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि धर्म और धार्मिक भावनाओं के आधार पर भी वोट मांगे गए। खलीक ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका खारिज करने की मांग करते हुए आरोपों को अस्पष्ट, बिना आधार और निराधार बताया था। हाईकोर्ट ने माना था कि याचिका में सुनवाई योग्य पूरा आधार नहीं बनाया गया है और उसे खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले के बाद मालेगांव सेंट्रल सीट पर खलीक का निर्वाचन बरकरार रहेगा।
दल-बदल मामले में बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र को सुप्रीम कोर्ट से झटका
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की उस याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा से अपनी अयोग्यता को चुनौती दी थी। अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागेंद्र को दल-बदल के मामले में विधायक पद से अयोग्य घोषित किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक टिप्पणी करते हुए नागेंद्र के मामले को ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम’ जैसा बताया। यह मुहावरा बार-बार राजनीतिक दल बदलने वाले नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
नागेंद्र खैरताबाद विधानसभा सीट से बीआरएस विधायक थे। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। हाईकोर्ट ने उन्हें 23 अप्रैल 2024 से तेलंगाना विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया था। यह मामला भाजपा विधायक एलेटी महेश्वर रेड्डी और बीआरएस नेता पी. कौशिक रेड्डी की याचिकाओं से जुड़ा था। उन्होंने नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने 11 मार्च को उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं।