शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे रविवार को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगे। दोनों पार्टियां चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रही हैं।
विरोध प्रदर्शन से पहले बात करते हुए, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि यह विरोध उन कोशिशों के खिलाफ एक सामूहिक प्रतिक्रिया है, जिनसे लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है।
संजय राउत ने क्या कहा?
उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'यह विरोध देश में चल रहे हिटलर-जैसे शासन, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, तानाशाही चलाने, वोट और चुनाव चुराने, और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है। यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।' उन्होंने कहा, 'राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने इस विरोध मार्च का एलान किया है और पूरे महा विकास अघाड़ी का इसे समर्थन हासिल है। मार्च शुरू होने वाला है और सभी नेता मंच से देश को संबोधित करेंगे।'
सांसद सावंत ने उद्धव और राज ठाकरे को लेकर क्या कहा?
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ आना इस विरोध प्रदर्शन को और मजबूती देगा। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन बताया।
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'आज देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। खासकर चुनाव आयोग में भ्रष्टाचार और उनके काम करने के तरीके को लेकर। वे गैर-कानूनी और असंवैधानिक तरीके से काम कर रहे हैं। इस मुद्दे ने पूरे भारत में आक्रोश पैदा कर दिया है। लेकिन जब 'ठाकरे' नाम इसमें जुड़ता है, तो इस आक्रोश को असली ताकत मिलती है; तभी इसे गति मिलती है। आज, दोनों भाई एक साथ यहां मौजूद हैं और मजबूती से इस नारे के साथ खड़े हैं। 'चुनाव आयोग हटाओ, देश बचाओ।' और 'देश बचाओ' से हमारा मतलब देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाना है। इसीलिए दोनों भाई यहां एक साथ आए हैं। यह एक प्रतीकात्मक कदम है। इसे समझिए जनता गुस्से और बेचैनी से उबल रही है। आज उस भावना का इजहार होगा।'
ठाकरेभाइयों ने पिछले महीने 4 अक्तूबर को मार्च निकालने की घोषणा की थी। यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) पर केंद्रित है। आयोजकों ने इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस और एनसीपी समेत विपक्षी दलों से भी शामिल होने की अपील की है।