पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच में ढिलाई के कारण संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत की अवधि और मुकदमे की धीमी प्रगति पर ध्यान दिया था। सीबीआई ने 24 अगस्त 2024 को दाखिल आरोपपत्र में घोष का नाम शामिल किया था। कांग्रेस ने पीड़िता ‘अभया’ को श्रद्धांजलि देते हुए न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच में ढिलाई के कारण आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराने और पीड़िता को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखने के संकल्प के साथ अस्पताल पहुंचे थे। शुभंकर सरकार ने कहा, 'संदीप घोष को जमानत मिलना केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच में ढिलाई का नतीजा है। पार्टी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।'
कांग्रेस के नेता आरजी कर अस्पताल क्यों पहुंचे?
शुभंकर सरकार और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। पीड़िता को ‘अभया’ नाम दिया गया था, जिसका अर्थ निडर होता है। वह 31 वर्षीय स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर थी। अस्पताल परिसर में लगी प्रतिमा का नाम ‘अभया: क्राई ऑफ द आवर’ है। इसमें एक चीखती हुई महिला को दिखाया गया है। कांग्रेस ने कहा कि दुर्गा पूजा के उत्सव के दौरान भी पार्टी पीड़िता को नहीं भूली है और न ही कभी भूलेगी। उसे न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को संदीप घोष की याचिका स्वीकार कर ली। इस याचिका में उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के 23 फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में बिताए गए लंबे समय और मुकदमे की प्रगति पर गौर किया। शीर्ष अदालत ने बताया कि घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में थे, जबकि मामले के 147 गवाहों में से केवल सात की ही गवाही दर्ज हो पाई थी।
संदीप घोष पर क्या आरोप हैं?
वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी। एजेंसी ने 24 अगस्त 2024 को दाखिल आरोपपत्र में संदीप घोष का नाम शामिल किया था। उन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।
संदीप घोष का नाम आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले से क्यों जुड़ा?
संदीप घोष उस समय आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य थे, जब नौ अगस्त 2024 को अस्पताल परिसर में 31 वर्षीय प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। कांग्रेस ने अब घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जमानत मिलने पर सवाल उठाए हैं और पीड़िता को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखने की बात कही है। ध्यान रहे कि जमानत वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मिली है।