कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज पर बंगलूरू में ‘कर्नाटक मंडपम’ बनाने पर विचार कर रही है। इसके लिए जक्कूर, मैसूर लैंप्स या मेट्रो स्टेशन के पास स्थित NGEF परिसर जैसे स्थानों पर विचार किया जा रहा है। शिवकुमार ने कहा कि यह पहल कर्नाटक की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन के जरिए दुनिया के सामने लाने की सरकार की कोशिशों का हिस्सा है। वह विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर पैलेस ग्राउंड्स में आयोजित पहले कर्नाटक पर्यटन पुरस्कार समारोह का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। इसकी जानकारी सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।
भारत मंडपम की तर्ज पर होगा ‘कर्नाटक मंडपम’
शिवकुमार ने कहा, ‘सरकार दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज पर ‘कर्नाटक मंडपम’ बनाने पर विचार कर रही है। इसके लिए जक्कूर, मैसूर लैंप्स या मेट्रो स्टेशन के पास NGEF परिसर जैसे स्थानों पर विचार किया जा रहा है।’ उनका कहना था कि ऐसी सुविधाओं से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ बड़े आयोजनों के लिए भी बेहतर ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
कोडागु और मलनाड में पर्यटन, लेकिन पर्यावरण से समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोडागु और मलनाड क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है। हालांकि, इसके साथ पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक का पर्यावरण राज्य की सबसे बड़ी संपत्ति है और पर्यटन विकास ऐसा होना चाहिए जिससे प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहे। पर्यटन आंखों और मन को खुशी देता है। हमारे राज्य का पर्यावरण हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। हमारी सरकार कला, संस्कृति और मनोरंजन समेत पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।’
बंगलूरू में दो लाख से ज्यादा विदेशी पासपोर्ट धारक
शिवकुमार ने कहा कि बंगलूरू में दो लाख से ज्यादा विदेशी पासपोर्ट धारक काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में नए होटल खोलने वालों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस व्यवस्था के जरिए दो से तीन महीने के भीतर जरूरी मंजूरियां मिल सकेंगी।
360 किलोमीटर लंबा समुद्र तट, फिर भी पर्यटन की बड़ी गुंजाइश
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक ने अपने 360 किलोमीटर लंबे समुद्र तट की पर्यटन क्षमता का अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने तटीय और मलनाड इलाकों की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा को पर्यटन के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से कोस्टल मलनाड कर्नाटक टूरिज्म पॉलिसी-2026 को मंजूरी दे दी है।
पर्यटन परियोजनाओं को मिलेगा उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा
शिवकुमार ने कहा कि इस नई नीति के तहत पर्यटन परियोजनाओं को ‘इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस’ देने का फैसला किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
CRZ नियमों पर केंद्र से मदद मांगेगी सरकार
उन्होंने कहा कि सरकार तटीय विनियमन क्षेत्र यानी CRZ नियमों से जुड़ी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार से भी मदद मांगेगी। इसके लिए केरल और गोवा में लागू नीतियों का उदाहरण दिया गया है। उनका कहना था कि तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देते समय नियमों और स्थानीय परिस्थितियों के बीच बेहतर संतुलन जरूरी है।
गाइड और टैक्सी ड्राइवर होंगे पर्यटन के ‘ब्रांड एंबेसडर’
शिवकुमार ने कहा कि टूरिस्ट गाइड और टैक्सी ड्राइवरों को पर्यटन के राजदूत के तौर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने कर्नाटक की प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक विरासत को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से पेश करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पर्यटन से जुड़ने के लिए प्रतिबद्धता और उत्साह होना जरूरी है। इनके बिना पर्यटन के क्षेत्र में सफल होना संभव नहीं है।’
बंगलूरू में बड़े शो और नया कन्वेंशन सेंटर
मुख्यमंत्री ने बताया कि बंगलूरू में एक बड़े कन्वेंशन सेंटर की स्थापना पर भी विचार किया जा रहा है। इस मुद्दे पर अगले सप्ताह कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के साथ बैठक में चर्चा की जाएगी।उन्होंने कहा कि BookMyShow की टीम ने बंगलूरू में सालाना कम से कम 25 से 30 बड़े शो आयोजित करने पर चर्चा की है, जिनमें Coldplay जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। फिलहाल ऐसे बड़े आयोजनों के लिए मुंबई का भी इस्तेमाल किया जाता है। शिवकुमार ने कहा कि इसी जरूरत को देखते हुए सरकार कन्वेंशन सेंटर बनाने के विकल्प पर विचार कर रही है।
एशिया का सबसे ऊंचा स्काई डेक बनाने की तैयारी
शिवकुमार ने बताया कि सरकार एक उपयुक्त स्थान की पहचान कर प्रस्तावित एशिया के सबसे ऊंचे स्काई डेक को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के जरिए विकसित करेगी। इसका उद्देश्य भी राज्य में एक नया बड़ा पर्यटन आकर्षण तैयार करना है।
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‘मंगलुरु आई’ को लेकर बोले- काम आसान नहीं
प्रस्तावित ‘मंगलुरु आई’, यानी दुबई की तर्ज पर बनाए जाने वाले स्काई टावर और पर्यटन आकर्षण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे लागू करना मुश्किल और समय लेने वाला होगा। उन्होंने कहा कि मंगलुरु में लिए गए फैसलों को सिर्फ घोषणा तक सीमित रखने के बजाय उनके क्रियान्वयन के लिए लगातार आगे बढ़ना जरूरी है।