विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (एलओसी ) का स्थिर होना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी के नतीजे भुगतने होंगे।
चीन से क्या कहा?
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के रिश्तों को बढ़ाने को सीमा पर शांति और स्थिरता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, 'हम चीन से यही कहते हैं। अगर आप सामान्य रिश्ते चाहते हैं, अगर बाकी रिश्ते आगे बढ़ने हैं, तो यह सामान्य समझ की बात है। यह साफ है कि सीमा स्थिर होनी चाहिए और हमें सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता की जरूरत है।'
जयशंकर ने क्या कहा?
मंगलवार शाम ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि 2024 के बाद से एलओसी पर हालात काफी हद तक स्थिर हो गए हैं और रिश्ते उसी हिसाब से सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से ज्यादा समय तक चले मिलिट्री गतिरोध से बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह गतिरोध 2024 के आखिर में खत्म हुआ।
अर्ली हार्वेस्ट पर क्या बोले?
इस सवाल पर कि क्या सीमा विवाद पर "अर्ली हार्वेस्ट" (शुरुआती दौर का) समझौता होने पर भारत देश में और चीनी निवेश की इजाजत देगा, जयशंकर ने मोटे तौर पर कहा कि कई संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम अब उन संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। हमें देखना होगा कि हम आगे कैसे बढ़ते हैं।
लेकिन हम इस बात पर जोर नहीं दे रहे हैं कि व्यापार करने के लिए सीमा विवाद को हल करना ही होगा। हमारा कहना यह है: शर्त कम है।शर्त यह है: शांति और स्थिरता बनाए रखें। मैं 'अर्ली हार्वेस्ट' को सीमा विवाद के समाधान के अलावा किसी और चीज से नहीं जोड़ूंगा। व्यापार या बाजार तक पहुंच के मुद्दों पर हमारी जो भी नीति होगी। उस पर अलग से काम किया जाएगा।'
आर्थिक मुद्दों पर भी जताई चिंता
विदेश मंत्री ने चीन के साथ आर्थिक मुद्दों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'चीन के साथ हमारे बहुत बड़े आर्थिक मुद्दे भी हैं। अगर आप आज व्यापार संतुलन को देखें, तो यह पूरी तरह से (चीन की ओर) झुका हुआ है।' यह झुकाव बहुत ज्यादा एकतरफा है, और कई सेक्टर में जहां हमने बाकी दुनिया के साथ अच्छा प्रदर्शन किया है। वहां हमें बाजार तक पहुंच नहीं मिली है। उस सेक्टर के लिए चीन में हमारा बिजनेस ऑपरेशन सफल नहीं रहा है।'
उन्होंने कहा, 'आज हमारा मानना है कि हमें चीन में वैसा 'लेवल प्लेइंग फील्ड' (समान अवसर) नहीं मिल रहा है, जैसा हमने उन्हें दिया है।' जयशंकर ने 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों का भी जिक्र किया और बताया कि कैसे इससे रिश्ते बहुत तनावपूर्ण हो गए थे।
गलवान घाटी झड़प पर भी की बात
उन्होंने कहा, '1975 से 2020 तक, पूरे 45 वर्षों तक, उस सीमा पर कोई खून नहीं बहा। पिछली बार मौतें 1975 में हुई थीं। इस दौरान, भारत-चीन संबंध बेहतर हुए।' उन्होंने कहा, 'फिर 2020 में, जब हम कोविड लॉकडाउन के दौर से गुजर रहे थे, तब सीमा पर कई विवाद हुए और मामला एक ऐसी झड़प तक पहुंच गया जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक मारे गए।'
उन्होंने कहा, 'हमारे लिए, यह 1975 से चली आ रही स्थिति से एक बहुत बड़ा बदलाव था। अगर सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता भंग होती है, तो रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा।' जयशंकर ने कहा कि शांति और स्थिरता बहाल होने तक, अगले कुछ वर्षों में इसके नतीजे साफ तौर पर दिखाई दिए।