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नौसेना को मिले दो स्वदेशी आरओवी: समुद्र के नीचे निगरानी, टोह लेने जैसे कामों को मिलेगी मजबूती

Thu, 08 Oct 2026 04:49 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

भारतीय नौसेना की समुद्र के नीचे निगरानी करने और टोह लेने की क्षमताओं में अब इजाफा होगा। नौसेना को दो आरओवी मिले हैं। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और आरओवी से कैसे हालात बदलेंगे?
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भारतीय नौसेना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केरलम की मरीन रोबोटिक्स और एआई डीप-टेक कंपनी आईआरओवी ने पहली बार दो मिलिट्री-ग्रेड अंडरवाटर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) प्रणाली का स्वदेश में निर्माण कर उन्हें भारतीय नौसेना को सौंपा। इससे उन्नत अंडरवाटर रोबोटिक टेक्नोलॉजी में भारत की अपनी क्षमता बनाने की कोशिशों को बढ़ावा मिला है। इन आरओवी की जरिये नौसेना को समुद्र के नीचे निगरानी, टोह लेने व अन्य जरूरी कार्यों में मजबूती मिलेगी।
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ट्राउट, भारत में बना पहला मिलिट्री ग्रेड आरओवी
इस आरओवी को ट्राउट नाम दिया गया है। ट्राउट, नदी या झरनों में पाई जाने वाली एक प्रकार की बड़ी मछली है। बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, ट्राउट भारत में बना पहला मिलिट्री-ग्रेड आरओवी है। इसे नौसेना के अभियानों के लिए सैन्य मानकों के हिसाब से डिजाइन, विकास, विनिर्माण और क्वालिफाई किया गया है। भारतीय नौसेना ने इस प्रकार के पांच आरओवी के ऑर्डर दिए हैं, जिसके तहत प्राथमिक तौर पर दो की आपूर्ति की गई है। 

सेना के लिए अहम स्वदेशी तकनीक विकसित करने की पहल
आईआरओवी के सीईओ व को-फाउंडर जॉन्स टी. मथाई ने भारतीय नौसेना को ट्राउट प्रणाली की आपूर्ति को आईआरओवी के सफर में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वाकांक्षी स्वदेशी इंजीनियरिंग प्रोग्राम के तौर पर शुरू हुआ था और अब भारतीय नौसेना के मिशन के लिए तैयार अंडरवाटर रोबोटिक प्लेटफॉर्म बन गया है।
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