विपक्षी नेता और सांसद मंगलवार की सुबह राष्ट्रीय राजधानी में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय 'निर्वाचन सदन' तक मार्च करने वाले हैं। यह मार्च 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर उनके चल रहे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा है।
क्यों हो रहा है यह मार्च?
यह मार्च मतदाता सूची में कथित खामियों के खिलाफ विपक्ष के लगातार अभियान और चुनाव आयोग से ज्यादा पारदर्शिता की मांग के बीच हो रहा है। 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की कई पार्टियों के नेताओं के इस मार्च में शामिल होने और चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखने की उम्मीद है।
यह विरोध प्रदर्शन विपक्ष के लोकतंत्र बचाओ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत इसके नेता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और जन-कार्यक्रम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव को 'निर्वाचन सदन' तक का यह मार्च और तेज कर देगा।
सांसद जयराम रमेश ने क्या कहा था?
इससे पहले 5 अक्तूबर को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था कि 'इंडिया' गठबंधन के तय कार्यक्रमों के तहत, सभी विपक्षी दलों के सांसद मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। यह मार्च कथित वोट चोरी के मुद्दे और सीईसी कुमार को हटाने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
कब से शुरू होगा मार्च?
रमेश ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (PCC) के अध्यक्षों और प्रभारियों की दो घंटे तक बैठक हुई।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों से मार्च से पहले सुबह 10:30 बजे मकर द्वार पर इकट्ठा होने के लिए कहा गया है। सुबह 11 बजे, सभी विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे।
आगे का क्या प्लान है?
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, 'यह मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। 8 अक्तूबर तक, इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां जिला स्तर पर पदयात्राएं आयोजित करेंगी। प्रदर्शन और बैठकें भी होंगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वोट चोरी के मुद्दे और सीईसी को हटाने की मांग को लेकर, 10 अक्तूबर से 20 अक्तूबर तक ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी। 25 अक्तूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर पर और हर गांव में चौपालों पर 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैलियां आयोजित की जाएंगी। इस महीने का मकसद उन 13.5 करोड़ मतदाताओं के बारे में जानकारी जुटाना होगा जिनके नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं।
मुख्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को चुनाव आयोग के मुख्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है, उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग संगठनों के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद से ही शुक्रवार से नई दिल्ली में अहम जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह विरोध प्रदर्शन 30 सितंबर को 19 विपक्षी पार्टियों की बैठक के बाद बुलाया गया था।
दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग की आलोचना की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने तीन-सदस्यीय निकाय में मतभेद के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।