जेएनयू से बर्खास्तगी और दिल्ली पुलिस की FIR के बाद कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम विवादों में हैं। जानें उन पर क्या आरोप लगे हैं, अकोइजम ने अपने बचाव में क्या कहा और इस पर क्यों गहराया सियासी घमासान।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से निकाले गए प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ सोमवार को जबरदस्त प्रदर्शन किए। केंद्र और दिल्ली में सत्तासीन इस दल ने मामले में कांग्रेस को घसीटते हुए उस पर अकोइजम को बचाने के आरोप लगा दिए। भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अकोइजम के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टर लहराए।
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इस घटना के ठीक बाद देशभर में अंगोमचा बिमोल अकोइजम और उनके कांग्रेस से कनेक्शन की चर्चाएं शुरू हो गईं। आइये जानते हैं कि जेएनयू में विवादों में घिरने के बाद यूनिवर्सिटी से निकाले गए प्रोफेसर के बारे में अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं? जिस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है, वह केस क्या है? अपने ऊपर लगे आरोपों पर अकोइजम का क्या कहना है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम चर्चा में क्यों?
अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम जेएनयू की तरफ से उन्हें प्रोफेसर पद से बर्खास्त करने और उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद से चर्चा में है। दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई।
कौन हैं अंगोमचा बिमोल अकोइजम?
अकोइजम ने 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में पीएचडी की थी। वे जेएनयू के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर रहे हैं।
उनके पास 16 साल का अध्यापन और अनुसंधान का अनुभव है। उन्होंने सामाजिक एवं राजनीतिक मनोविज्ञान और सांस्कृतिक अध्ययन में शोध किया है।
वे लोकसभा में इनर मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आए सांसद हैं। उन्होंने 2024 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी।
अंगोमचा बिमोल अकोइजम।
- फोटो : अमर उजाला
अकोइजम को किस मामले में आरोपी बनाया गया, केस क्या?
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर 11 अक्तूबर 2026 को दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और धारा 79 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा/लज्जा को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर कम से कम 11 छात्राओं ने इससे जुड़े आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता छात्राओं का आरोप है कि उन्हें बैठकों या चर्चाओं के बहाने कैंपस स्थित उनके आवास पर बुलाया जाता था और यौन उत्पीड़न का प्रयास किया जाता था।
आरोप है कि अकोइजम अकादमिक मूल्यांकन और वाइवा परीक्षाओं को देर रात (रात 11:40 बजे तक) अपने निजी आवास पर आयोजित करते थे।
कक्षाओं में अनुचित/अश्लील टिप्पणियां करने और छात्राओं से उनके निजी जीवन (जैसे बॉयफ्रेंड, डेटिंग हिस्ट्री आदि) के बारे में अनुचित सवाल पूछने का आरोप।
जेएनयू की आंतरिक जांच समिति की जांच के मुताबिक, अकोइजम पर अवांछित शारीरिक संपर्क और शिक्षक-छात्र संबंधों की सीमाओं के उल्लंघन के आरोप पाए गए हैं।
अकोइजम ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या कहा?
अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित 'विच हंट' यानी उन्हें निशाना बनाकर रची गई साजिश करार दिया है। अकोइजम का कहना है कि यह उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश है।
उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि जेएनयू प्रशासन ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न निवारण (पॉश) कानून की उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। उनके मुताबिक, उन्हें समिति की सिफारिशों की प्रति उपलब्ध कराए बिना और उस पर जवाब देने का अवसर दिए बिना ही बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया।
अंगोमचा बिमोल अकोइजम।
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने जेएनयू की कुलपति के उन दावों को झूठा बताया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और कोई गवाह पेश नहीं किया। अकोइजम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 31 मई को लिखित जवाब दिया था, 16 जुलाई को खुद बयान दर्ज कराया था और 14 अगस्त को उनके गवाहों के बयान दर्ज हुए थे। उन्होंने 300 ईमेल भेजने के कुलपति के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें केवल 43 ईमेल मिले थे, जिनका उन्होंने जवाब दिया था।
अकोइजम ने आरोप लगाया कि स्थापित नियमों और कानूनों को दरकिनार कर विश्वविद्यालय को खाप पंचायत की तरह चलाया जा रहा है और मीडिया ट्रायल के जरिए गैर-मौजूद आरोप फैलाए जा रहे हैं। अकोइजम ने कहा कि उनकी लीगल टीम इस प्रक्रियात्मक अनियमितता और आरोपों को कानूनी रूप से चुनौती देगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वे मणिपुर की जनता की आवाज हैं और राजनीतिक दबाव में उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता।
सियासी विवाद में कैसे बदल गया अकोइजम की बर्खास्तगी का मामला?
अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर से कांग्रेस सांसद हैं। उनकी बर्खास्तगी की खबर आने के बाद केंद्र में सत्तासीन भाजपा ने कांग्रेस को घेरा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
भाजपा नेताओं, जैसे- स्मृति ईरानी, बांसुरी स्वराज, नितिन नवीन, तरुण चुघ और राधिका खेड़ा ने आरोप लगाया कि महिलाओं के मुद्दों पर बोलने वाले राहुल गांधी अपने ही सांसद पर लगे गंभीर आरोपों पर चुप हैं।
अंगोमचा बिमोल अकोइजम।
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने कांग्रेस के 'नारी सशक्तिकरण' और 'पितृसत्ता को खत्म करो' वाले के नारों को दोहरा रवैया व खोखला राजनीतिक नाटक करार दिया।
भाजपा कार्यकर्ताओं और महिला मोर्चा ने दिल्ली में पोस्टरों के साथ कांग्रेस मुख्यालय और अन्य स्थानों पर विशाल प्रदर्शन किए। साथ ही अकोइजम के इस्तीफे की मांग की।
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम, भाजपा राज्य अध्यक्ष ए. शारदा देवी और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अकोइजम से तुरंत सांसद पद से इस्तीफा देने और जनता से माफी मांगने की मांग की।
एन. बीरेन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे व्यक्ति को संरक्षण दे रहे हैं और उन्हें इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
सवाल-जवाब में जेएनयू और सांसद बिमोल अकोइजम से जुड़ा विवाद
सवाल-1: अंगोमचा बिमोल अकोइजम कौन हैं? जवाब: डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर रहे हैं। वे जून 2024 के लोकसभा चुनाव में मणिपुर की इनर मणिपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए।
सवाल-2: जेएनयू ने बिमोल अकोइजम को क्यों हटाया? जवाब: मई 2026 में विश्वविद्यालय की लगभग 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति की ओर से गई जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद, कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने 9 अक्तूबर 2026 को उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
सवाल-3: पुलिस प्रशासन ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है? जवाब: जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर 11 अक्तूबर 2026 को दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
सवाल-4: अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर अकोइजम का क्या कहना है? जवाब: बिमोल अकोइजम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित विच हंट बताया है। उन्होंने जेएनयू प्रशासन पर पॉश कानून और प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है तथा कहा है कि उन्हें जांच रिपोर्ट और बर्खास्तगी आदेश की प्रति दिए बिना ही कार्रवाई की गई।
सवाल-5: इस मुद्दे पर क्या राजनीतिक घमासान चल रहा है? जवाब: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं तथा सांसद के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। वहीं मणिपुर के स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी उनसे इस्तीफा देने और जनता से माफी मांगने की मांग की है।