16 नॉन रेजिडेंशियल स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर्स में शिफ्ट किए सभी बच्चे
पहले तीन चरण पूरे करने वाले 40 बच्चों का स्कूल में करवाया दाखिला
समग्र शिक्षा के तहत पढ़ाई से वंचित बच्चों को प्रदान करवाई जा रही शिक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। समग्र शिक्षा के तहत डाइट सोलन की ओर से किए गए आउट ऑफ स्कूल सर्वे में अब तक 1190 बच्चों को चिह्नित किया गया है। इन बच्चों को जिले में संचालित 16 नॉन रेजिडेंशियल स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर (एनआरएसटीसी) में दाखिल कर पढ़ाई शुरू करवाई गई। पहली तिमाही के बाद इनमें से 40 बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है।
समग्र शिक्षा के तहत प्रत्येक डाइट को अपने जिले में पढ़ाई से वंचित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें एनआरएसटीसी में पढ़ाई के लिए भेजने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी के तहत डाइट सोलन ने धर्मपुर, रामशहर और नालागढ़ शिक्षा खंड में आउट ऑफ स्कूल सर्वे करवाया। पहले किए गए सर्वे में 1326 बच्चे चिन्हित हुए थे। इनमें अधिकांश माइग्रेंट लेबर के बच्चे थे। बाद में 1190 बच्चे ही एनआरएसटीसी में दाखिल हो सके, जबकि अन्य बच्चों के माता-पिता जिला छोड़कर चले गए।
जिले में कुल 16 एनआरएसटीसी संचालित हैं। इनमें धर्मपुर शिक्षा खंड में तीन, रामशहर में 12 और नालागढ़ में एक सेंटर है। इनका संचालन दो एनजीओ कर रहे हैं और इनकी फंडिंग समग्र शिक्षा के तहत की जा रही है। बच्चों को लेखन सामग्री, वर्दी और किताबें भी उपलब्ध करवाई जाती हैं। सेंटर के लिए स्थान और स्टाफ की व्यवस्था एनजीओ की ओर से की जाती है।
कोट
जिला परियोजना अधिकारी डॉ. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि आउट ऑफ स्कूल सर्वे में चिन्हित 1190 बच्चों को 16 एनआरएसटीसी में दाखिल किया गया था। पहली तिमाही के बाद 40 बच्चों का विभिन्न स्कूलों में दाखिला करवाया गया है। सेंटरों का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है।
क्या हैं एनआरएसटीसी
नॉन रेजिडेंशियल स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर (एनआरएसटीसी) ऐसे शिक्षा केंद्र हैं, जहां पढ़ाई से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाता है और उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित की जाती है। निर्धारित मानक पूरे करने के बाद बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुसार स्कूलों में दाखिला दिलाया जाता है। सेंटर में बच्चों को न्यूनतम तीन माह और अधिकतम दो साल तक रखा जाता है। इस दौरान उन्हें लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 पूरा करना होता है। तीनों स्तर पूरे करने के बाद बच्चे को उसकी उम्र और शैक्षणिक स्तर के अनुसार स्कूल में दाखिला दिया जाता है।