चरखी दादरी। हरियाणा सरकार रोडवेज की बसों की कमी के बावजूद सरकारी बेड़े को मजबूत करने के बजाय प्राइवेट एवं सहकारी समितियों की बसों को नए रूट देने की तैयारी कर रही है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने सरकार की इस नीति का विरोध करते हुए इसे जनहित और युवाओं के हितों के खिलाफ बताया है।
साझा मोर्चा के प्रवक्ता एवं एचआरएसकेएस के राज्य नेता सुधीर अहलावत ने कहा कि जींद जिले में लगभग 35 रूट प्राइवेट एवं सहकारी समितियों की बसों को देने की तैयारी की चर्चा है। इससे पहले जनवरी 2024 में भी सरकार ने निजी बसों को 295 रूट देने का प्रयास किया गया था जिसके विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने 24 जनवरी को हड़ताल एवं चक्का जाम किया था।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में यात्रियों की जरूरत के अनुसार सरकारी बसों की कमी है तो रोडवेज का बेड़ा बढ़ाने की बजाय निजी बसों को प्राथमिकता देना समझ से परे है। निजी एवं सहकारी बसों के संबंध में निर्धारित रूट व समय-सारणी का पालन नहीं करने, निःशुल्क यात्रा के सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सुधीर अहलावत ने कहा कि निजी बसों को बढ़ावा देने से रोडवेज विभाग कमजोर होगा और स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के अवसर भी प्रभावित होंगे। हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 11,000 नई बसें शामिल कर कुल बेड़ा 15,000 बसों का करना चाहिए।