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बृजभूषण मामले में नया मोड़: चार महिला पहलवानों ने खटखटाया सत्र अदालत का दरवाजा, उत्पीड़न केस में दी चुनौती

Fri, 25 Sep 2026 03:50 PM IST
Rahul Kumar Tiwari एएनआई, नई दिल्ली

सार

चार महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व डब्ल्यूएफआई प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी है। 
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बृजभूषण के बरी होने को कोर्ट में चुनौती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी है। महिला पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।
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पहलवानों ने दावा किया है कि निचली अदालत का आदेश अनुमान और अटकलों पर आधारित है। इसमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी धारणाएं आधार बनी हैं। महिला पहलवानों ने अदालत से अपील पर विचार करने की मांग की है।

दरअसल, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है। इस पर सोनीपत के पूर्व ओलंपिक पद विजेता बजरंग पुनिया ने कहा था कि वह मामले को लेकर अब हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
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शनिवार को हो सकती है सुनवाई
इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए मामलों) दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार यानी 26 सितंबर को होने की संभावना है। महिला पहलवानों ने अपनी अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून की नजर में टिकाऊ नहीं बताते हुए कहा है कि मामले में उपलब्ध सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया।

तीन अगस्त को कोर्ट ने किया था बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने तीन अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना।

यह था पूरा मामला
यह मामला 18 जनवरी 2023 को शुरू हुआ था और इसमें कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। करीब 30 पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर मंतर पर धरना दिया। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया इनमें शामिल थे। बृजभूषण पर पहलवानों ने यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। खेल मंत्रालय ने उसी समय एक समिति का गठित की थी। 
  •  21 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस को नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों ने यौन शोषण की शिकायत दी थी। इसके बाद पहलवानों ने उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया था। 
  • चार मई 2023 को उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
  • 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पहलवानों ने इस मामले को लेकर जुलूस निकाला। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। 
  • 30 मई 2023 को पहलवान अपने पदक बहाने हरिद्वार पहुंचे। अधिकारियों के समझाने पर उन्होंने अपना फैसला टाल दिया था। 
  • सात जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री और पहलवानों के बीच एक बैठक हुई थी।

आरोप पत्र और पॉक्सो मामले का समापन
  • 15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। यहीं से इस मामले में नया मोड़ आया। नाबालिग पहलवान और उसके पिता ने इस मामले में अपने बयान बदल दिए। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग पहलवान वाले पॉक्सो मामले में समापन रिपोर्ट दायर की। जुलाई 2023 में अदालत ने बृजभूषण को अस्थायी जमानत दे दी थी।
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आरोपों का निर्धारण और बरी होना
  • मई 2024 में राउज़ एवेन्यू अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने और आपराधिक धमकी जैसे कई आरोप तय किए। बृजभूषण शरण सिंह ने इन आरोपों को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। अदालत में उनसे पूछा गया कि क्या वे अपनी गलती मानते हैं, तो उन्होंने कहा, 'कोई सवाल ही नहीं है। जब गलती नहीं की तो उसे मानें क्यों।'
  • वर्ष 2025 में दोनों पक्षों की दलीलें चलीं। पॉक्सो मामले में दिल्ली पुलिस की समापन रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर ली और यह मामला औपचारिक रूप से बंद हो गया। हालांकि, अन्य महिला पहलवानों की शिकायतों पर मुकदमा जारी था। अदालत ने सभी गवाहों और पहलवानों के बयान दर्ज किए।
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