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उत्तराखंड: पेयजल से मौत मामला, 15 दिन में योजनाओं का भौतिक सत्यापन निर्देश, पीसीबी करेगा पानी की जांच

Wed, 23 Sep 2026 09:38 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

ज्योलिकोट की घटना ने पेयजल व्यवस्था की निगरानी और फील्ड स्तर पर सूचना तंत्र को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सरकार ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जांचने के साथ पानी की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।
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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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नैनीताल के ज्योलिकोट में दूषित पेयजल से मौत मामले पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन नाराज हैं। उन्होंने समीक्षा बैठक में घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पेयजल की गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि मजबूत फील्ड नेटवर्क के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड स्तर के कार्मिकों का नेटवर्क हमारे पास है। इस नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए सूचना एवं फीडबैक तंत्र विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी, सरफेस वाटर के साथ ही प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल की गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का सरप्राइज निरीक्षण भी कराए जाने के निर्देश दिए।

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मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।

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जियो मैपिंग और भौतिक सत्यापन के निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदेश की प्रमुख पेयजल योजनाओं की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। कहा कि जल आपूर्ति प्रणाली में स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, भंडारण, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग पॉइंट आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग कराई जाए। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख पेयजल योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग पाइंट्स और उपभोक्ता के स्तर पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिह्नित कराने, जहां पुराने पाइप हैं उन्हें बदलने के निर्देश दिए।

इंदौर घटना के बाद बनी थी एसओपी, अनुपालन कहां नहीं हुआ

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी। इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। निर्देश दिए कि पेयजल लाइनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार की जाए। उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

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सतत निगरानी होगी, शिकायत पर तत्काल पहुंचेंगी स्वास्थ्य टीम

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार के मामले सामने आते हैं, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ एवं सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय करते हुए डॉक्टरों की टीम को सक्रिय रखा जाए। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस एवं जांच की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहें। कहा कि यह व्यवस्था एक बार का अभ्यास नहीं बल्कि स्थायी निगरानी तंत्र के रूप में विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग अपने पूर्व इंजीनियरों के अनुभव का भी लाभ ले।

 

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