टेस्ट क्रिकेट में बारिश ही नहीं, खराब रोशनी भी खेल का बड़ा दुश्मन बनती जा रही है। कई बार मैदान पर बारिश नहीं होती, लेकिन आसमान में बादल छाने या शाम ढलने के कारण बल्लेबाजों और फील्डरों के लिए गेंद को देखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अंपायर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खेल रोक देते हैं। इससे ओवरों का नुकसान होता है और मैच के नतीजे पर भी असर पड़ सकता है। अब इस समस्या से निपटने के लिए दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर शॉन पोलक ने दिन के टेस्ट मैचों में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। सवाल यह है कि क्या गुलाबी गेंद टेस्ट क्रिकेट के खेल के घंटों को बचा सकती है?
डरबन टेस्ट में खराब रोशनी ने बिगाड़ा खेल
दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच डरबन के किंग्समीड मैदान पर खेले गए टेस्ट में खराब रोशनी के कारण खेल काफी प्रभावित हुआ। शुरुआती तीन दिनों में लगभग 50 ओवरों का नुकसान हुआ। यह स्थिति बताती है कि टेस्ट क्रिकेट में मौसम से जुड़ी चुनौतियां केवल बारिश तक सीमित नहीं हैं।
टेस्ट मैच पांच दिन तक चलता है और हर दिन निर्धारित समय में अधिक से अधिक खेल कराने की कोशिश होती है। सामान्य तौर पर एक दिन में 90 ओवर फेंकने का लक्ष्य रहता है। पांच दिनों में कुल 450 ओवर का खेल निर्धारित होता है। लेकिन जब खराब रोशनी के कारण बार-बार खेल रोकना पड़े, तो टीमों को अपनी रणनीति के मुताबिक खेलने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसका असर दर्शकों पर भी पड़ता है। टिकट खरीदकर मैदान पहुंचने वाले प्रशंसकों को पूरा खेल देखने का मौका नहीं मिल पाता। वहीं, मुकाबले में नतीजा निकलने की संभावनाएं भी कम हो सकती हैं। कई बार टीमों के पास मैच का रुख बदलने के लिए जरूरी समय ही नहीं बचता।
लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद का सुझाव क्यों?
टेस्ट क्रिकेट में दिन के मैचों के दौरान पारंपरिक रूप से लाल गेंद का इस्तेमाल होता है। तेज रोशनी में इसे आसानी से देखा जा सकता है, लेकिन आसमान में घने बादल छाने या शाम के समय रोशनी कम होने पर गेंद को पहचानना मुश्किल हो सकता है। शॉन पोलक का सुझाव है कि ऐसी परिस्थितियों में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका चमकीला रंग कम रोशनी और बादलों से घिरे आसमान में गेंद को देखने में मदद कर सकता है। लाल गेंद की तुलना में गुलाबी गेंद का रंग अधिक स्पष्ट नजर आ सकता है।
गुलाबी गेंद के इस्तेमाल के पीछे तीन प्रमुख तर्क हैं:
बेहतर तरीके से दिखना: बादलों के बीच या शाम ढलने के दौरान गेंद को पहचानना आसान हो सकता है।
खेल में कम रुकावट: यदि गेंद स्पष्ट दिखाई दे रही हो, तो खराब रोशनी के कारण खेल रोकने की नौबत कम आ सकती है।
नतीजे की बेहतर संभावना: खेल के अधिक ओवर पूरे होने से दोनों टीमों को मुकाबले में अपना पूरा दम दिखाने का समय मिल सकता है।
हालांकि, गुलाबी गेंद हर तरह की रोशनी में खेल जारी रखने की गारंटी नहीं देती। यदि दृश्यता खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है, तो अंपायरों को खेल रोकने का फैसला लेना पड़ सकता है।
क्या आईसीसी के नियम इसकी अनुमति देते हैं?
गुलाबी गेंद का इस्तेमाल आमतौर पर दिन-रात के टेस्ट मैचों में किया जाता है। ऐसे मुकाबलों में दिन के साथ शाम और रात के समय भी खेल होता है। गुलाबी गेंद को कम रोशनी और फ्लडलाइट में बेहतर दृश्यता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने खराब दृश्यता की समस्या से निपटने के लिए सामान्य दिन के टेस्ट मैचों में भी गुलाबी गेंद के इस्तेमाल की व्यवस्था की है। हालांकि, इसके लिए दोनों टीमों के कप्तानों की सहमति जरूरी है। उन्हें टॉस से पहले इस बदलाव पर सहमत होना होगा। इस व्यवस्था के तहत गुलाबी गेंद को दिन के टेस्ट में इस्तेमाल करने का विकल्प मिल सकता है। लेकिन इसके लिए टीमों की सहमति और लागू नियमों का पालन जरूरी होगा।
लाल और गुलाबी गेंद में क्या है अंतर?
| आधार | लाल गेंद | गुलाबी गेंद |
|---|---|---|
| प्रमुख इस्तेमाल | दिन के टेस्ट मैच | दिन-रात के टेस्ट मैच |
| दृश्यता | कम रोशनी और बादलों में देखने में परेशानी हो सकती है | कम रोशनी में अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई दे सकती है |
| प्रमुख फायदा | टेस्ट क्रिकेट की पारंपरिक गेंद | दृश्यता की समस्या कम करने में मदद |
| संभावित भूमिका | सामान्य दिन के खेल के लिए | खराब रोशनी में खेल के समय को बचाने का विकल्प |