सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में अपने दो ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायतों पर जवाब दाखिल कर दिया। हालांकि, ट्रस्ट ने अपने जवाब में क्या कहा है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
नियुक्तियों और कामकाज पर उठाए सवाल
उद्योगपति वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने ट्रस्ट में नियुक्तियों को लेकर कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। उनका आरोप है कि ट्रस्ट के नामित निदेशकों को स्वतंत्र रूप से फैसले लेने से रोका जा रहा है।
नोएल टाटा और नेविल टाटा का नाम
दोनों ट्रस्टियों ने अपनी शिकायतों में ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके बेटे व उपाध्यक्ष नेविल टाटा का नाम लिया है। शिकायतों में नोएल टाटा को स्थायी ट्रस्टी बनाए जाने पर सवाल उठाने के साथ ट्रस्ट के कामकाज और फैसले लेने के तरीके पर भी आपत्ति जताई गई है।
टाटा संस में हिस्सेदारी को लेकर अहम भूमिका
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 24 फीसदी हिस्सेदारी है। इससे वह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है। टाटा संस, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट को जवाब देने के लिए पहले 12 अक्टूबर तक का समय दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 19 अक्टूबर कर दिया गया।
फैसलों से दूर रखने का आरोप
श्रीनिवासन और सिंह ने चैरिटी कमिश्नर से शिकायत के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों को भी पत्र लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अहम फैसलों में शामिल नहीं किया जा रहा है। इसमें टाटा संस के विलय से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक के लिस्टिंग नियमों के संदर्भ में चर्चा हुई है।
ये भी पढ़ें:
बिजनेस अपडेट्स: 16 स्वदेशी पशुधन और कुत्ते की नस्लों को मिली सरकारी पहचान, जानिए क्या फैसला
लिस्टिंग को लेकर प्रस्ताव
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस और उसकी दो सहायक कंपनियों से जुड़ी लिस्टिंग योजना का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत टाटा संस की भूमिका केवल होल्डिंग कंपनी तक सीमित न रहकर कारोबार चलाने वाली कंपनी की भी हो सकती है। इसी मुद्दे के बीच ट्रस्ट के कामकाज को लेकर विवाद बढ़ा है।