दिल्ली में बुधवार को सोने के दाम लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरे। कमजोर स्थानीय मांग और वैश्विक रुझानों के कारण यह 700 रुपये सस्ता होकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 99.9 फीसदी शुद्धता वाला पीला धातु एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, सभी करों सहित यह 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिका। मंगलवार को इसका बंद भाव 1,49,600 रुपये था। 29 सितंबर को सोने का भाव 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट - कमोडिटीज, सौमिल गांधी ने बताया कि कमजोर वैश्विक संकेतों और खुदरा मांग में कमी से घरेलू बाजार में सोने के दाम गिरे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं से कच्चे तेल में उछाल आया। इससे भी कीमती धातु की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, विश्लेषकों ने बताया कि रुपये के मूल्य में गिरावट ने सोने की तेजी को सीमित रखा। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे गिरकर 96.78 (अनंतिम) पर बंद हुआ। इस बीच, चांदी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों का क्या हाल?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाजिर सोना 47.42 डॉलर या 1.14 फीसदी गिरकर 4,116.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 2.26 फीसदी गिरकर 59.97 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जो लगभग तीन महीने का निचला स्तर है। सफेद धातु आखिरी बार 9 जुलाई को 59.96 डॉलर प्रति औंस पर थी। निवेश मंच मुड्रेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने बताया कि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण का इंतजार कर रहे हैं। इससे फेड के ब्याज दर दृष्टिकोण पर संकेत मिल सकते हैं।
डॉलर और ब्याज दरों का क्या असर?
एक मजबूत डॉलर, जो 18 महीने के उच्च स्तर के करीब है, सोने की तेजी को भी सीमित कर रहा है। दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना 70 फीसदी बनी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दी है। यह लगभग चार साल में पहली बढ़ोतरी है। बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्रा के कारण आगे भी दर वृद्धि के संकेत दिए गए हैं।
आरबीआई की नीति में क्या बदलाव आया?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री राधिका पिपलानी के अनुसार, आरबीआई ने अपनी नीतिगत रुख को तटस्थ से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल दिया है। यह बैंकिंग प्रणाली की तरलता और नीतिगत दरों को कसने का इरादा दर्शाता है ताकि मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सके। वे इस चक्र में 75 आधार अंक की और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे रेपो दर 6.25 फीसदी हो जाएगी। इसमें दिसंबर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी शामिल है, जिसे बाजार प्रतिभागियों ने पहले ही काफी हद तक मान लिया है।