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बजट 2027-28 की तैयारी शुरू: वित्त मंत्रालय 12 अक्तूबर से करेगा बैठकों का आगाज, जानें कितने दिन चलेगा सिलसिला

Wed, 23 Sep 2026 07:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वित्त मंत्रालय 12 अक्तूबर से केंद्रीय बजट 2027-28 की तैयारी के लिए बजट पूर्व बैठकें शुरू करेगा। यह मोदी 3.0 सरकार का चौथा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार दसवां बजट होगा, जो वैश्विक चुनौतियों और मजबूत घरेलू वृद्धि की पृष्ठभूमि में पेश होगा।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय बजट 2027-28 की तैयारियों के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। मंत्रालय 12 अक्तूबर से बजट पूर्व बैठकों की एक महीने लंबी शृंखला शुरू करेगा। ये बैठकें संशोधित अनुमान 2026-27 और बजट अनुमान 2027-28 को अंतिम रूप देने के लिए होंगी।

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बजट प्रभाग के एक नोटिस में यह जानकारी दी गई है। व्यय सचिव की अध्यक्षता में ये चर्चाएं होंगी। सभी मंत्रालयों और विभागों को 23 सितंबर, 2026 को नोटिस भेजा गया है। इसमें व्यय विभाग के साथ बैठकों का पूरा कार्यक्रम है। मंत्रालयों को 6 अक्तूबर, 2026 तक आवश्यक विवरण जमा करने होंगे। ये बैठकें 13 नवंबर तक जारी रहेंगी।

बजट अनुमान 2027-28 इन बैठकों के बाद अनंतिम रूप से तय किए जाएंगे। बजट 2027-28 एक फरवरी को पेश होने की संभावना है। यह मोदी 3.0 सरकार का चौथा बजट होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार दसवां बजट होगा, जो भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच क्या होगा बजट का आधार?

बजट 2027-28 पश्चिमी एशिया संकट की पृष्ठभूमि में पेश किया जाएगा। इस संकट से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ी हुई हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव है। वैश्विक वृद्धि में भी कमी देखी जा रही है। इन चुनौतियों के बीच सरकार को संतुलन साधना होगा।

भारत की आर्थिक स्थिति कैसी है?

चालू वित्त वर्ष में घरेलू वृद्धि करीब 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। भारत ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की है। यह दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर है। मजबूत घरेलू वृद्धि बजट के लिए सकारात्मक संकेत है। यह सरकार को आर्थिक नीतियों में लचीलापन प्रदान करेगा।

आगामी बजट में किन बातों पर रहेगा जोर?

अगले वित्त वर्ष के बजट में सुधारों को जारी रखने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आर्थिक वृद्धि को और तेज करना है। रोजगार सृजन के उपायों पर भी जोर रहेगा। घरेलू मांग को बढ़ावा देने के कदम भी शामिल होंगे। सरकार इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकती है।

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