बिहार में 14 सितंबर को पति की लंबी उम्र की कामना का व्रत मनाया जाएगा। इसको लेकर महिला व्रतियों ने बाजार में जमकर खरीदारी की। ज्योतिष और हिंदू धर्म की परंपरा के तहत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया एवं चतुर्थी एक ही दिन होने के कारण इस वर्ष तीज और गणेश चतुर्थी व्रत चौथ व्रती एक ही दिन कर सकेंगी और इस बार 14 सितंबर, सोमवार को हरितालिका तीज का यह पवित्र व्रत रखेंगी।
बता दें कि यह व्रत अपनी संतान के साथ अपने पति की लंबी आयु एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। हरितालिका व्रत कुंवारी एवं विवाहित, नवविवाहित महिलाओं द्वारा माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ रखा जाता है।
हरितालिका तीज व्रत को लेकर बाजार में विशेष रौनक देखने को मिली है। फल बाजार से लेकर पूजन सामग्री और साज-श्रृंगार की दुकानों में भीड़ उमड़ पड़ी है। इस दौरान महिलाओं ने बताया कि यह पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और शिव के प्रति आस्था और समर्पण के अलावा पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना से हरितालिका तृतीया यानी तीज व्रत करती हैं। इसमें महिलाएं अन्न-जल ग्रहण किए बिना पूरे श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं। पुराणों के अनुसार, इस व्रत को देवी पार्वती ने किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शंकर की प्राप्ति हुई थी। इस दिन पूजन-अर्चन के साथ मां पार्वती की कथा भी सुनी जाती है, जिसमें देवी पार्वती के त्याग, धैर्य और एकनिष्ठ पतिव्रत की भावना को जानकर उनका मन विभोर हो उठता है। इस दिन मुख्य रूप से शिव और पार्वती तथा मंगलकारी गणेश जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
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मुजफ्फरपुर शहर के सुप्रसिद्ध लहठी बाजार में भी हरितालिका तीज व्रत को लेकर महिलाओं में उत्साह देखने को मिला है। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने लहठी की खरीदारी की है। आपको बता दें कि लहठी महिलाओं के श्रृंगार के एक बेहद महत्वपूर्ण साधन के रूप में मानी जाती है और यही वजह है कि इसे हम सब खरीदते हैं और फिर इसे पहनकर पूजन करते हैं और भगवान शिव की हरितालिका तीज व्रत की कथा सुनते हैं। इस व्रत का सभी को एक वर्ष तक इंतजार रहता है और फिर अब वह पल आ गया है। हम सब इसे कल पूर्ण निष्ठा, आस्था और समर्पण के साथ मनाएंगे।
हरितालिका तीज व्रत
हरितालिका तीज व्रत
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