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जर्मनी की आवाज: एलिस एलिजाबेथ वीडल की सियासी सफलता खास क्यों, कैसे दशकों बाद सत्ता के करीब आया दक्षिणपंथी दल?
Mon, 14 Sep 2026 11:43 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:43 AM IST
सार
जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य में एलिस एलिजाबेथ वीडल की पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है। एलिस इसके बाद से सुर्खियों में हैं। चर्चा की प्रमुख वजह लंबी अवधि के बाद दक्षिणपंथी नेता की जीत है। दरअसल, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में सत्ता के करीब पहुंची है।
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जर्मनी में एलिस एलिजाबेथ वीडल को राजनीतिक सफलता
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एआई ग्राफिक्स
विस्तार
बचपन में वामपंथी शिक्षकों का विरोध करने वाली एएफडी की सह-अध्यक्ष एलिस वीडल एक बार फिर चर्चा में हैं। यह उनका ही करिश्मा है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में सत्ता के करीब पहुंची है।
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राजनीति नहीं, अर्थशास्त्र थी पहचान
छह फरवरी, 1979 को पश्चिमी जर्मनी के गुटरस्लोह में जन्मी एलिस वीडल का पूरा नाम एलिस एलिजाबेथ वीडल है। उनका पालन-पोषण हार्सविकेल कस्बे में एक रोमन कैथोलिक परिवार में हुआ। वीडल ने 1998 में वर्समोल्ड से एबिटुर, यानी जर्मनी की उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। बाद में उन्होंने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट किया। राजनीति में आने से पहले उनका शुरुआती कॅरिअर वित्त और कॉरपोरेट क्षेत्र में रहा। उन्होंने चीन में रहते हुए बैंक ऑफ चाइना के लिए भी काम किया, और बाद में राजनीति में सक्रिय होने से पहले एक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दी।
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बात 2013-14 के दौर की है। जर्मनी की राजनीति एक बड़े सवाल से घिर रही थी कि शरणार्थियों को लेकर देश का रुख क्या हो? सीरिया समेत युद्धग्रस्त देशों से बड़ी संख्या में लोग यूरोप, खासकर जर्मनी पहुंच रहे थे। शरणार्थियों का मुद्दा जर्मनी की राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका था। इसी उथल-पुथल में उभर रही थी एक नई पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी यानी एएफडी। पार्टी के भीतर एक युवा महिला अपने बेबाक अंदाज के कारण तेजी से पहचान बनाने लगी थी।
अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट, चीन में काम का अनुभव, मंदारिन पर जबर्दस्त पकड़ और गोल्डमैन सैश जैसी वित्तीय संस्था में नौकरी कर चुकी इस युवती की पृष्ठभूमि पारंपरिक राजनेताओं से बिल्कुल अलग थी। 2013 में एएफडी से जुड़ने के बाद उसने शुरुआत में यूरो और आर्थिक नीतियों पर पार्टी के रुख का खुलकर समर्थन किया। लेकिन, 2015 का शरणार्थी संकट उनके राजनीतिक सफर का निर्णायक मोड़ बना। उसी साल जुलाई में वह पार्टी के संघीय कार्यकारी बोर्ड में शामिल हुईं और जल्द ही अपने तीखे बयानों के कारण एएफडी की प्रमुख आवाज बन गईं।
दो साल बाद, 2017 के चुनाव में एएफडी 12.6 प्रतिशत वोट के साथ बुंडेस्टैग की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। और इस सफलता के प्रमुख चेहरों में वही महिला थी, जिसका नाम है एलिस वीडल। आज जर्मनी की चर्चित दक्षिणपंथी नेताओं में शामिल और एएफडी की सह-अध्यक्ष एलिस वीडल एक बार फिर चर्चा में हैं। जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट में एएफडी की लगभग 44 प्रतिशत वोट वाली ऐतिहासिक जीत और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ हालिया राजनीतिक भिड़ंत की वजह से वह इस वक्त दुनियाभर की सुर्खियों में छाई हुई हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में सत्ता के करीब पहुंची है और एएफडी के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडल का बड़ा हाथ माना जाता है।
निजी जिंदगी की अलग कहानी
एलिस वीडल समलैंगिक (लेस्बियन) हैं और पिछले लगभग दो दशकों से अपनी साथी सारा बोस्सार्ड के साथ रिश्ते में हैं। सारा बोस्सार्ड मूल रूप से श्रीलंका से हैं। उन्हें एक स्विस परिवार ने गोद लिया, वह स्विट्जरलैंड में पली-बढ़ीं और वहीं फिल्म निर्माण से जुड़ी हैं। एलिस की जिंदगी का यह पहलू इसलिए चर्चा में रहता है, क्योंकि वह जिस पार्टी से ताल्लुक रखती हैं, उसकी नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं। दोनों के दो दत्तक पुत्र हैं, जिनकी परवरिश वे मिलकर करती है। वीडल को एएफडी में शामिल होने का विचार पार्टनर सारा से ही मिला था।
विरोध का अनोखा अंदाज
स्कूल के दिनों में एलिस की अपने कुछ शिक्षकों से बनती नहीं थी। उन्हें शिक्षकों का वामपंथी झुकाव और पढ़ाने का तरीका पसंद नहीं आता था। इस वैचारिक असहमति को वह अपने अंदाज में जाहिर करती और उन शिक्षकों को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज कार से स्कूल पहुंचने लगी। उस दौर में एक छोटे जर्मन कस्बे के स्कूल में महंगी कार से पहुंचना अपने आप में चर्चा का विषय था। स्कूली दिनों में उनके सहपाठी और घरवाले उन्हें 'लिल' नाम से बुलाते थे। स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थी। हालांकि, उनके पिता इसके खिलाफ थे।
दादा का हिटलर से नाता
वीडल सार्वजनिक रूप से खुद को अज्ञेयवादी (ईश्वर के अस्तित्व पर संदेह रखने वाली) मानती हैं। एलिस ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक मानती हैं। वीडल के दादा हंस वीडल नाजी शासन के दौर में न्यायाधीश थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्हें एडोल्फ हिटलर के आदेश पर 'चीफ स्टाफ जज' नियुक्त किया गया था। हालांकि, विश्वयुद्ध में हार के बाद उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा।
तैराकी, किताबें और संगीत
बचपन से ही तैराकी और टेनिस की शौकीन रहीं एलिस वीडल फेंग शुई में भी गहरी रुचि रखती हैं। पढ़ना-लिखना वीडल का खास शौक है। इसकी झलक उनकी लिखी पुस्तक विडरवोर्टः गेडांकेन उबर डॉयचलैंड' में साफ दिखाई देती है। राजनीति के शोर से दूर, अपने खाली वक्त में उन्हें पहाड़ों की सैर करना, साइकिल चलाना और तैराकी, टेनिस जैसे खेलों में वक्त बिताना पसंद है। इसके साथ ही, वह संगीत और 'ड्रम एंड बेस' की भी शौकीन हैं।