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भारत आ रहे हैं विदेश मंत्री रूबियो: जामनगर की रिफाइनरी पर अमेरिका की नजर, ऊर्जा सहयोग को लेकर क्या है तैयारी?
Wed, 14 Oct 2026 07:36 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 14 Oct 2026 07:36 AM IST
सार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 17 से 22 अक्तूबर तक उज्बेकिस्तान और भारत के दौरे पर रहेंगे। भारत में वह मुंबई और जामनगर जाएंगे और भारतीय अधिकारियों से रणनीतिक साझेदारी तथा ऊर्जा सहयोग पर चर्चा करेंगे। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की प्रतिदिन 14 लाख बैरल कच्चा तेल संसाधित करने की क्षमता वाली रिफाइनरी है। इससे पहले रूबियो मई में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए थे।
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मार्को रूबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 17 से 22 अक्तूबर तक उज्बेकिस्तान और भारत के दौरे पर रहेंगे। रूबियो का भारत दौरा ऊर्जा सहयोग और निवेश के लिहाज से अहम होगा। इस दौरान वह मुंबई और जामनगर जाएंगे। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी एकल-परिसर तेल रिफाइनरी है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, रूबियो भारतीय अधिकारियों और कारोबारी नेताओं से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
क्यों आ रहे हैं मार्को रूबियो?
अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को बताया कि इस यात्रा का मकसद भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। भारत में रूबियो मुंबई और जामनगर जाएंगे। इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी भारतीय अधिकारियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान होगा।
रूबियो के जामनगर दौरे को क्यों माना जा रहा है अहम?
जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेल रिफाइनरी है, इसकी कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता प्रतिदिन 14 लाख बैरल है। रूबियो के दौरे में ऊर्जा सहयोग अहम मुद्दा रहेगा। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने जामनगर यात्रा के दौरान होने वाली किसी विशेष बैठक या समझौते का अलग से विवरण नहीं दिया है।
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अमेरिका और रिलायंस की रिफाइनरी परियोजना का क्या संबंध?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में घोषणा की थी कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश से अमेरिका में 50 साल में पहली बार नई रिफाइनरी बनाई जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउन्सविले में 300 अरब डॉलर की लागत से बनेगी। रूबियो की जामनगर यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होनी है। हालांकि, मूल खबर में इस परियोजना को लेकर रूबियो की यात्रा के दौरान किसी नए समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
मई में भी रूबियो भारत आए थे। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। अक्तूबर का यह दौरा मई के बाद उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इस बार वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
यह भी पढ़ें: मशीन के पीछे था इंसानी दिमाग?: जर्मनी में लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में रोबोट जब्त, जांच के घेरे में दो युवक
भारत से पहले रूबियो कहां जाएंगे और उनके साथ कौन होगा?
भारत आने से पहले रूबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। वहां वह सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस मंच के जरिए अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। रूबियो इन पांच देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। इनमें उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज गणराज्य इस समूह में शामिल हैं।
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क्यों आ रहे हैं मार्को रूबियो?
अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को बताया कि इस यात्रा का मकसद भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। भारत में रूबियो मुंबई और जामनगर जाएंगे। इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी भारतीय अधिकारियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान होगा।
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रूबियो के जामनगर दौरे को क्यों माना जा रहा है अहम?
जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेल रिफाइनरी है, इसकी कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता प्रतिदिन 14 लाख बैरल है। रूबियो के दौरे में ऊर्जा सहयोग अहम मुद्दा रहेगा। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने जामनगर यात्रा के दौरान होने वाली किसी विशेष बैठक या समझौते का अलग से विवरण नहीं दिया है।
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अमेरिका और रिलायंस की रिफाइनरी परियोजना का क्या संबंध?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में घोषणा की थी कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश से अमेरिका में 50 साल में पहली बार नई रिफाइनरी बनाई जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउन्सविले में 300 अरब डॉलर की लागत से बनेगी। रूबियो की जामनगर यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होनी है। हालांकि, मूल खबर में इस परियोजना को लेकर रूबियो की यात्रा के दौरान किसी नए समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
मई में भी रूबियो भारत आए थे। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। अक्तूबर का यह दौरा मई के बाद उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इस बार वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
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भारत से पहले रूबियो कहां जाएंगे और उनके साथ कौन होगा?
भारत आने से पहले रूबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। वहां वह सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस मंच के जरिए अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। रूबियो इन पांच देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। इनमें उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज गणराज्य इस समूह में शामिल हैं।