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अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस: बोस्टन में जुटे भारत समेत चार देशों के विशेषज्ञ, योग और आधुनिक चिकित्सा पर मंथन
Fri, 25 Sep 2026 04:34 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बोस्टन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बोस्टन
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:34 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2026 पर बोस्टन में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और मॉरीशस के विशेषज्ञ जुटे। सम्मेलन में आयुर्वेद, योग, आधुनिक चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सहयोग पर जोर दिया।
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बोस्टन में जुटे चार देशों के विशेषज्ञ
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2026 के मौके पर अमेरिका के बोस्टन में आयुर्वेद, योग, आधुनिक चिकित्सा और इंटीग्रेटिव हेल्थ से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे। यहां आयोजित आधे दिन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और मॉरीशस के डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
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सम्मेलन का विषय 'आयुर्वेद के माध्यम से वैश्विक कल्याण की पुनर्कल्पना' रखा गया। इसका आयोजन बोस्टन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट (बीओसीई) ने चेस्टनट हिल स्थित ब्रिघम एंड विमेंस हेल्थ केयर सेंटर में किया। ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल का प्रमुख शिक्षण सहयोगी है।
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भारतीय परंपरा के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत धन्वंतरि और सरस्वती की प्रार्थना से हुई। आयुर्वेद अनुसंधान के लिए वैश्विक परिषद की संस्थापक डॉ. प्रतिभा शाह और डॉ. शारन्या ने प्रार्थना का नेतृत्व किया। इसके बाद अतिथियों और वक्ताओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम को बोस्टन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास का सहयोग मिला। इसके अलावा जीसीएआर, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल के ओशर सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव हेल्थ और बेथ इस्राइल डेकोनेस मेडिकल सेंटर के सद्गुरु सेंटर फॉर ए कॉन्शियस प्लैनेट ने भी इसमें सहयोग किया।
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आयुर्वेद, योग और आधुनिक चिकित्सा पर चर्चा
बीओसीई के सह-संस्थापक और कार्यक्रम के होस्ट प्रमित माकोडे ने कहा कि केंद्र पिछले 12 वर्षों से पूर्व और पश्चिम की स्वास्थ्य परंपराओं को एक साथ लाने की दिशा में काम कर रहा है। सम्मेलन में आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद, योग, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य देखभाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. बाला सुब्रमण्यम ने तंत्रिका तंत्र के नियमन और मन-शरीर स्वास्थ्य से जुड़े शोध पर बात की। वहीं डॉ. दर्शन मेहता ने साक्ष्य आधारित इंटीग्रेटिव हेल्थ और मेडिकल शिक्षा में मन-शरीर आधारित तरीकों की भूमिका पर चर्चा की।
भारत से भी कई विशेषज्ञ शामिल
जामनगर स्थित आयुर्वेद अध्यापन एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) की निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी ने आयुर्वेद में शोध, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर अपने विचार रखे। योग विशेषज्ञ और एस-व्यास विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं चांसलर पद्मश्री डॉ. एचआर नागेंद्र ने भारत से विशेष संबोधन दिया। उन्होंने स्वास्थ्य और कल्याण में योग और आयुर्वेद के योगदान पर बात की।
वहीं डॉ. कृष्ण भट्टा ने जीवनशैली, संतुलन और व्यक्तिगत कल्याण से जुड़े अपने 'कृष्ण के 5 युक्त' फ्रेमवर्क को प्रस्तुत किया। मॉरीशस से डॉ. पूजा सभरवाल ने आयुर्वेद और स्वास्थ्य से जुड़े विचार साझा किए। ब्रिटेन से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के समर्थक अमरजीत सिंह भामरा ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया।
'आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक प्रणालियां साथ चल सकती हैं'
सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखने के बजाय उनके बीच सहयोग की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। वक्ताओं ने आयुर्वेद, योग, पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के बीच संभावित सहयोग पर विचार रखे।
जीसीएआर की संस्थापक और सम्मेलन की सह-मेजबान एवं मॉडरेटर डॉ. प्रतिभा शाह ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच चर्चा का संचालन किया। बोस्टन उत्कृष्टता केंद्र के चेयरमैन डॉ. बल राम सिंह ने आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिक शोध, शिक्षा और अकादमिक प्रकाशनों के महत्व पर जोर दिया।
बिऑन्ड 100 पर भी हुई चर्चा
सम्मेलन में 'बिऑन्ड 100' की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। इसमें सिर्फ लंबी उम्र के बजाय स्वस्थ, सक्रिय और उद्देश्यपूर्ण जीवन पर ध्यान देने की बात सामने आई। भारत के उद्यमी और परोपकारी डॉ. बीके मोदी ने '100 साल से ज्यादा उम्र में खुशहाल, स्वस्थ, समृद्ध और उद्देश्यपूर्ण जीवन' की अपनी सोच साझा की। वहीं मैसाचुसेट्स के बिजनेसमैन और एमआरसीसी ग्रुप के संस्थापक अनिल शाह ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक और नवाचार की संभावनाओं पर बात की। कार्यक्रम में आयुर्वेद, योग और इंटीग्रेटिव हेल्थ से जुड़े शोध, किताबें और प्रकाशन भी प्रदर्शित किए गए।
आगे भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तैयारी
बीओसीई ने कहा कि वह अमेरिका, भारत और अन्य देशों के डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, आयुर्वेद और योग विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने का काम जारी रखेगा। कार्यक्रम का समापन विशेष रूप से तैयार किए गए आयुर्वेदिक और सात्विक भोजन के साथ हुआ। सम्मेलन में प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं और आधुनिक विज्ञान के बीच शोध एवं सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।