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फ्रांस में प्रदर्शनों के पीछे वैश्विक वामपंथी संगठन?: भारत में भी हिंसा भड़काने की साजिश, रिपोर्ट में दावा
Mon, 19 Oct 2026 09:29 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, वॉशिंगटन
एएनआई, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 19 Oct 2026 09:29 AM IST
सार
फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े नेटवर्क में 50 संगठन शामिल हैं, जिनमें श्रमिक संघ, राजनीतिक दल और वामपंथी समूह भी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नेटवर्क की गतिविधियां अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक फैली हैं।
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फ्रांस में सड़कों पर जनाक्रोश
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के पीछे वैश्विक वामपंथी संगठनों के नेटवर्क की भूमिका होने का दावा किया गया है। फॉक्स न्यूज डिजिटल की 9 अक्तूबर को प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के छात्र आंदोलन और उससे जुड़े समर्थक नेटवर्क में 50 संगठनों की पहचान की गई है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कम्युनिस्ट, समाजवादी और वामपंथी संगठन स्कूलों की स्थिति को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के जरिए अपने व्यापक राजनीतिक और वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।
फॉक्स न्यूज डिजिटल ने जिन 50 संगठनों का विश्लेषण किया, उनमें से 15 छात्र या युवा संगठन हैं। बाकी 35 संगठनों में श्रमिक संघ, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन, राजनीतिक दल, नागरिक अधिकार समूह और अन्य अभियान चलाने वाले संगठन शामिल हैं।
अमेरिका से भारत तक मिले नेटवर्क के तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नेटवर्क का विस्तार फ्रांस से आगे अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक है। इसमें शामिल संगठन समर्थकों को जुटाने, हड़तालों की अपील करने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिये प्रदर्शनों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। शुरुआत में शिक्षा से जुड़ी शिकायतों पर केंद्रित इस आंदोलन में बाद में ऐसे समूह भी शामिल हो गए, जिनके राजनीतिक उद्देश्य पूंजीवाद, सरकारी खर्च में कटौती, पुलिस व्यवस्था, सैन्य खर्च और इस्राइल से जुड़े मुद्दों तक फैले हुए हैं।
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भारत से जुड़े संगठन का भी जिक्र
फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट में फ्रांस स्थित संगठन इंडियन अलायंस पेरिस का भी जिक्र किया गया है। यह संगठन छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संगठन ने सोशल मीडिया पर फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन किया और उनकी तुलना भारत में हुए छात्र प्रदर्शनों से की। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक्स पर एक संदेश पोस्ट करते हुए दोनों देशों के युवाओं के समर्थन में लिखा, "जेन जी के नाम: फ्रांस में। भारत में। आज के लिए शाबाश।"
संगठन के एक्स अकाउंट पर भारत में हुए प्रदर्शनों से संबंधित कई पोस्ट भी हैं। 6 अक्तूबर को संगठन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो साझा किया। इसके साथ लिखा, "संसद में विपक्ष के नेता को नई दिल्ली में गिरफ्तार किया जा रहा है। भारत सरकार शर्म करो। दिल्ली पुलिस शर्म करो।"
7 अक्तूबर को संगठन ने एक समाचार क्लिप साझा की, जिसमें दावा किया गया था कि पुलिस मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने से रोक रही है और विपक्षी कार्यकर्ताओं तथा नेताओं को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया जा रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या इसके बावजूद इसे लोकतंत्र कहा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान पर भी आरोप
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में न्यूयॉर्क स्थित मीडिया संस्थान ब्रेकथ्रू न्यूज का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनों को प्रचारित किया। इसमें प्रदर्शनों को "मितव्ययिता के खिलाफ ऐतिहासिक हड़ताल" बताया गया और छात्रों तथा पुलिस के बीच टकराव के वीडियो साझा किए गए।
जेडी वेंस ने भी की थी टिप्पणी
रिपोर्ट में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। वेंस ने फ्रांस में छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के लिए विविधता की आड़ में उदारवादी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराया था। वेंस ने उम्मीद जताई थी कि फ्रांस में हिंसा रुकेगी और वहां की ऐतिहासिक इमारतों को और नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी इस स्थिति पर ध्यान देने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था, "पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर तीसरी दुनिया को फ्रांस और अन्य देशों में ला दिया। उन्होंने लोगों के समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया। उन्हें चेतावनी दी गई थी कि इसका परिणाम ऐसा होगा, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।"
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस में प्रदर्शन जारी रहने के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि हिंसा को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। फ्रांस 24 के अनुसार, यह बयान बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बाद आया। सप्ताहांत में हिंसक समूहों और पुलिस के बीच टकराव तथा दुकानों में लूटपाट की घटनाओं के बाद पुलिस ने 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।
शनिवार को राजधानी पेरिस और देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशव्यापी मार्च के दौरान हुए। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह आग लगाई, जबकि चोरों ने दर्जनों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घुसकर लूटपाट की।
यह अशांति कई सप्ताह से चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बाद सामने आई। शनिवार को पेरिस के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में हजारों लोगों ने एक बड़े प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "सब पुलिस से नफरत करते हैं" और "मैक्रों इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए।
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फॉक्स न्यूज डिजिटल ने जिन 50 संगठनों का विश्लेषण किया, उनमें से 15 छात्र या युवा संगठन हैं। बाकी 35 संगठनों में श्रमिक संघ, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन, राजनीतिक दल, नागरिक अधिकार समूह और अन्य अभियान चलाने वाले संगठन शामिल हैं।
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अमेरिका से भारत तक मिले नेटवर्क के तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नेटवर्क का विस्तार फ्रांस से आगे अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक है। इसमें शामिल संगठन समर्थकों को जुटाने, हड़तालों की अपील करने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिये प्रदर्शनों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। शुरुआत में शिक्षा से जुड़ी शिकायतों पर केंद्रित इस आंदोलन में बाद में ऐसे समूह भी शामिल हो गए, जिनके राजनीतिक उद्देश्य पूंजीवाद, सरकारी खर्च में कटौती, पुलिस व्यवस्था, सैन्य खर्च और इस्राइल से जुड़े मुद्दों तक फैले हुए हैं।
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भारत से जुड़े संगठन का भी जिक्र
फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट में फ्रांस स्थित संगठन इंडियन अलायंस पेरिस का भी जिक्र किया गया है। यह संगठन छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संगठन ने सोशल मीडिया पर फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन किया और उनकी तुलना भारत में हुए छात्र प्रदर्शनों से की। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक्स पर एक संदेश पोस्ट करते हुए दोनों देशों के युवाओं के समर्थन में लिखा, "जेन जी के नाम: फ्रांस में। भारत में। आज के लिए शाबाश।"
संगठन के एक्स अकाउंट पर भारत में हुए प्रदर्शनों से संबंधित कई पोस्ट भी हैं। 6 अक्तूबर को संगठन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो साझा किया। इसके साथ लिखा, "संसद में विपक्ष के नेता को नई दिल्ली में गिरफ्तार किया जा रहा है। भारत सरकार शर्म करो। दिल्ली पुलिस शर्म करो।"
7 अक्तूबर को संगठन ने एक समाचार क्लिप साझा की, जिसमें दावा किया गया था कि पुलिस मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने से रोक रही है और विपक्षी कार्यकर्ताओं तथा नेताओं को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया जा रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या इसके बावजूद इसे लोकतंत्र कहा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान पर भी आरोप
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में न्यूयॉर्क स्थित मीडिया संस्थान ब्रेकथ्रू न्यूज का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनों को प्रचारित किया। इसमें प्रदर्शनों को "मितव्ययिता के खिलाफ ऐतिहासिक हड़ताल" बताया गया और छात्रों तथा पुलिस के बीच टकराव के वीडियो साझा किए गए।
जेडी वेंस ने भी की थी टिप्पणी
रिपोर्ट में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। वेंस ने फ्रांस में छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के लिए विविधता की आड़ में उदारवादी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराया था। वेंस ने उम्मीद जताई थी कि फ्रांस में हिंसा रुकेगी और वहां की ऐतिहासिक इमारतों को और नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी इस स्थिति पर ध्यान देने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था, "पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर तीसरी दुनिया को फ्रांस और अन्य देशों में ला दिया। उन्होंने लोगों के समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया। उन्हें चेतावनी दी गई थी कि इसका परिणाम ऐसा होगा, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।"
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस में प्रदर्शन जारी रहने के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि हिंसा को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। फ्रांस 24 के अनुसार, यह बयान बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बाद आया। सप्ताहांत में हिंसक समूहों और पुलिस के बीच टकराव तथा दुकानों में लूटपाट की घटनाओं के बाद पुलिस ने 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।
शनिवार को राजधानी पेरिस और देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशव्यापी मार्च के दौरान हुए। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह आग लगाई, जबकि चोरों ने दर्जनों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घुसकर लूटपाट की।
यह अशांति कई सप्ताह से चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बाद सामने आई। शनिवार को पेरिस के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में हजारों लोगों ने एक बड़े प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "सब पुलिस से नफरत करते हैं" और "मैक्रों इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए।