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एआई पर बढ़ी चिंता: बिल गेट्स ने दी चेतावनी, कहा- अरबों लोगों की ले सकता है जान; आखिर कैसे मच सकती है तबाही?
Mon, 28 Sep 2026 08:43 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:43 AM IST
सार
बिल गेट्स ने एआई के खतरनाक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई इतना शक्तिशाली हो सकता है कि इसका गलत इस्तेमाल बड़े हमलों और भारी तबाही का कारण बन सकता है। गेट्स ने एआई कंपनियों पर केवल भरोसा करने के बजाय सरकारों से कड़े सुरक्षा नियम बनाने की मांग की।
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बिल गेट्स, माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ऐसी घटनाओं की वजह बन सकता है जिनसे एक अरब लोगों की मौत हो सकती है। वॉशिंगटन में इस बात पर तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या सरकारों को एडवांस्ड एआई को रेगुलेट करना चाहिए या ऐसे नियमों से बचना चाहिए जो चीन के साथ होड़ में अमेरिका की रफ्तार धीमी कर सकते हैं।
गेट्स ने क्या कहा?
गेट्स ने एनबीसी के प्रोग्राम मीट द प्रेस में कहा, 'यह वाकई में विकास की दिशा में एक बड़ी घटना है। हमने एक ऐसी बुद्धिमान प्रजाति बनाई है जो कई मामलों में हमसे पहले ही ज्यादा स्मार्ट है। आने वाले कुछ वर्षों में तेजी से बेहतर होते हुए यह हमसे कहीं ज्यादा स्मार्ट हो जाएगी।'
क्या एआई इंसानों का अस्तित्व खत्म कर सकता है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या एआई इंसानों का अस्तित्व खत्म कर सकता है, तो गेट्स ने कहा, 'एआई निश्चित रूप से इतना शक्तिशाली है कि वह ऐसी घटनाएं करवा सकता है जिनसे, आप जानते हैं, अरबों लोगों की मौत हो सकती है।'
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कैसे मच सकती है तबाही?
उन्होंने आगे कहा, 'बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा लेटेस्ट एआई टूल्स का इस्तेमाल करने से जो ताकत बनती है, वैसा शक्तिशाली हथियार पहले कभी नहीं देखा गया।' गेट्स ने कहा कि सरकारों के पास बायोलॉजिकल हमलों, साइबर हमलों और इस टेक्नोलॉजी के दूसरे संभावित इस्तेमाल से जुड़े खतरनाक स्तरों को समझने के लिए जरूरी जानकारी और अनुभव की कमी है। उन्होंने कंपनियों द्वारा अपनी मर्जी से सुरक्षा उपाय अपनाने पर निर्भर रहने की बात को खारिज कर दिया।
गेट्स ने कैसे कानून की मांग की?
गेट्स ने कहा, 'किसी को भी नहीं लगता कि सिर्फ खुद से नियम बनाना (सेल्फ-रेगुलेशन) काफी है।' उन्होंने ऐसे कानून की मांग की जिसमें सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी हों। उन्होंने कहा कि ऐसी जरूरतों से इंडस्ट्री पर कुछ खर्च तो आएगा, लेकिन इससे इसके विकास की रफ्तार बहुत ज्यादा धीमी नहीं होगी। गेट्स ने कहा, 'हर एआई में ये सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग क्षमताएं होना जरूरी न करना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है।'
उनकी यह चेतावनी तब आई जब कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट प्रतिनिधि रो खन्ना (जिनके संसदीय क्षेत्र में सिलिकॉन वैली का कुछ हिस्सा आता है) ने अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे समझौते की मांग की जिसे वेरिफाई किया जा सके और जो ऐसे एआई सिस्टम पर रोक लगाए जो खुद को स्वतंत्र रूप से बेहतर बनाने में सक्षम हों।
रो खन्ना ने क्या कहा था?
खन्ना ने कहा कि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि ग्रेग कैसर के समर्थन वाले कानून से 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूविंग एआई' (खुद को बार-बार बेहतर बनाने वाले एआई) पर तब तक रोक लग जाएगी जब तक कि सुरक्षा उपाय लागू नहीं हो जाते।
बता दें कि भारत सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और डिजिटल वाणिज्य में एआई के उपयोग का तेजी से विस्तार कर रहा है। नई दिल्ली ने इस बात पर भी जोर दिया है कि एआई प्रशासन को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में नवाचार को बाधित किए बिना सुरक्षा, जवाबदेही और समान पहुंच को बढ़ावा देना चाहिए।
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गेट्स ने क्या कहा?
गेट्स ने एनबीसी के प्रोग्राम मीट द प्रेस में कहा, 'यह वाकई में विकास की दिशा में एक बड़ी घटना है। हमने एक ऐसी बुद्धिमान प्रजाति बनाई है जो कई मामलों में हमसे पहले ही ज्यादा स्मार्ट है। आने वाले कुछ वर्षों में तेजी से बेहतर होते हुए यह हमसे कहीं ज्यादा स्मार्ट हो जाएगी।'
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क्या एआई इंसानों का अस्तित्व खत्म कर सकता है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या एआई इंसानों का अस्तित्व खत्म कर सकता है, तो गेट्स ने कहा, 'एआई निश्चित रूप से इतना शक्तिशाली है कि वह ऐसी घटनाएं करवा सकता है जिनसे, आप जानते हैं, अरबों लोगों की मौत हो सकती है।'
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कैसे मच सकती है तबाही?
उन्होंने आगे कहा, 'बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा लेटेस्ट एआई टूल्स का इस्तेमाल करने से जो ताकत बनती है, वैसा शक्तिशाली हथियार पहले कभी नहीं देखा गया।' गेट्स ने कहा कि सरकारों के पास बायोलॉजिकल हमलों, साइबर हमलों और इस टेक्नोलॉजी के दूसरे संभावित इस्तेमाल से जुड़े खतरनाक स्तरों को समझने के लिए जरूरी जानकारी और अनुभव की कमी है। उन्होंने कंपनियों द्वारा अपनी मर्जी से सुरक्षा उपाय अपनाने पर निर्भर रहने की बात को खारिज कर दिया।
गेट्स ने कैसे कानून की मांग की?
गेट्स ने कहा, 'किसी को भी नहीं लगता कि सिर्फ खुद से नियम बनाना (सेल्फ-रेगुलेशन) काफी है।' उन्होंने ऐसे कानून की मांग की जिसमें सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी हों। उन्होंने कहा कि ऐसी जरूरतों से इंडस्ट्री पर कुछ खर्च तो आएगा, लेकिन इससे इसके विकास की रफ्तार बहुत ज्यादा धीमी नहीं होगी। गेट्स ने कहा, 'हर एआई में ये सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग क्षमताएं होना जरूरी न करना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है।'
उनकी यह चेतावनी तब आई जब कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट प्रतिनिधि रो खन्ना (जिनके संसदीय क्षेत्र में सिलिकॉन वैली का कुछ हिस्सा आता है) ने अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे समझौते की मांग की जिसे वेरिफाई किया जा सके और जो ऐसे एआई सिस्टम पर रोक लगाए जो खुद को स्वतंत्र रूप से बेहतर बनाने में सक्षम हों।
रो खन्ना ने क्या कहा था?
खन्ना ने कहा कि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि ग्रेग कैसर के समर्थन वाले कानून से 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूविंग एआई' (खुद को बार-बार बेहतर बनाने वाले एआई) पर तब तक रोक लग जाएगी जब तक कि सुरक्षा उपाय लागू नहीं हो जाते।
बता दें कि भारत सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और डिजिटल वाणिज्य में एआई के उपयोग का तेजी से विस्तार कर रहा है। नई दिल्ली ने इस बात पर भी जोर दिया है कि एआई प्रशासन को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में नवाचार को बाधित किए बिना सुरक्षा, जवाबदेही और समान पहुंच को बढ़ावा देना चाहिए।