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Uttarkashi News: धराली में आपदा के एक वर्ष बाद भी नहीं हुए सुरक्षात्मक कार्य
Sat, 10 Oct 2026 05:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 10 Oct 2026 05:17 PM IST
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मलबा कभी भी दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है
उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी के धराली में आपदा के एक वर्ष दो माह बीतने के बाद भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। वहां पर जगह-जगह बिखरा मलबा अभी भी आपदा के जख्मों की यादों को ताजा कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से मुआवजा देने के बाद अब मुड़कर भी धराली की ओर नहीं देखा जा रहा है। इसलिए यह मलबा कभी भी दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है।
स्थानीय निवासी संजय पंवार का कहना है कि सरकार की ओर से मुआवजा देने के बाद आपदा प्रभावितों की सुध नहीं ली जा रही है। एक वर्ष से अधिक समय हो गया है लेकिन खीर गंगा से अभी तक मलबा नहीं हटाया गया है। सिंचाई विभाग की ओर से मात्र खीर गंगा को उसके मूल धारा की ओर चैनलाइज किया गया लेकिन उसके अलावा यहां पर अभी तक किस प्रकार के कार्य नहीं किए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर मलबा हट जाता। तो लोग अपनी मलबे में दबी भूमि पर कुछ खेती व अन्य कार्य कर सकते थे। लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण यह मलबा भविष्य में कभी भी दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द ही वहां पर सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग की है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।
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उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी के धराली में आपदा के एक वर्ष दो माह बीतने के बाद भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। वहां पर जगह-जगह बिखरा मलबा अभी भी आपदा के जख्मों की यादों को ताजा कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से मुआवजा देने के बाद अब मुड़कर भी धराली की ओर नहीं देखा जा रहा है। इसलिए यह मलबा कभी भी दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है।
स्थानीय निवासी संजय पंवार का कहना है कि सरकार की ओर से मुआवजा देने के बाद आपदा प्रभावितों की सुध नहीं ली जा रही है। एक वर्ष से अधिक समय हो गया है लेकिन खीर गंगा से अभी तक मलबा नहीं हटाया गया है। सिंचाई विभाग की ओर से मात्र खीर गंगा को उसके मूल धारा की ओर चैनलाइज किया गया लेकिन उसके अलावा यहां पर अभी तक किस प्रकार के कार्य नहीं किए गए।
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ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर मलबा हट जाता। तो लोग अपनी मलबे में दबी भूमि पर कुछ खेती व अन्य कार्य कर सकते थे। लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण यह मलबा भविष्य में कभी भी दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द ही वहां पर सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग की है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।
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