धनराज को 2012 में खरीदा था: आजमगढ़ से तीन हाथी काशी गए हैं, मालिक ने कहा- पालने का है लाइसेंस; ये हैं नियम
धनराज हाथी को उसके मालिक ने 2012 में खरीदा था। वह रामलीला में 14वीं बार शामिल होने के लिए काशी आया था। मालिक के मुताबिक, आजमगढ़ से तीन हाथियों को काशी ले जाया गया है। उसने दावा किया कि उसके पास हाथी पालने का लाइसेंस है। धनराज के उत्पात मचाने के बाद हाथी के इस्तेमाल की अनुमति और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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रामनगर की रामलीला में आजमगढ़ के बरदह क्षेत्र के असवनिया गांव का हाथी धनराज 14वीं बार गया है। हाथी के मालिक जसवंत सिंह उर्फ शिवली ने बताया कि धनराज को 2012 में खरीदा था। रामनगर की रामलीला में पहले भी जा चुका है लेकिन ऐसी दिक्कत नहीं आर्द थी। इस बार आजमगढ़ से तीन हाथी रामलीला में गए हैं।
जसवंत सिंह के अनुसार, एक हथिनी को देखकर धनराज ने अपना संतुलन खो दिया और भागने लगा। वन विभाग और पुलिस की टीम के पहुंचने से पहले ही हाथी शांत हो गया था। इसके बाद टीम ने हाथी को अपने नियंत्रण में ले लिया। डॉक्टरों ने हाथी को स्वस्थ बताया है। जसवंत सिंह ने बताया कि उनके पास हाथी को पालने का लाइसेंस है। रामनगर तक का ट्रांसपोर्ट परमिट भी है। हाथी स्वस्थ है। तीनों हाथियों की वापसी रामलीला समाप्त होने के बाद होगी। धनराज भी इन्हीं हाथियों में से एक है।
2013 में पहले दिन शाही बग्घी से लीला स्थल पहुंचे थे कुंवर, अगले दिन फिर हाथी की सवारी
वन विभाग ने 2013 में दुर्ग प्रबंधन से आख्या मांगी और वन्यजीव प्रभाग लखनऊ से अनुमति लेने को कहा था। उस साल लीला के पहले दिन (18 सितंबर 2013) कुंवर अनंत नारायण सिंह हाथी की जगह शाही बग्घी से लीला स्थल पहुंचे थे, लेकिन अगले दिन फिर हाथियों का इस्तेमाल शुरू हो गया। इसके बाद भी हाथियों के इस्तेमाल पर रोक प्रभावी नहीं रही।
दो की जगह चार हाथी मंगाने का दावा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पहले रामलीला में कुंवर अनंत नारायण सिंह और उनके पुत्र यानी युवराज के लिए दो हाथी ही मंगाए जाते थे। अब हाथियों की संख्या बढ़ाकर चार कर दी गई। दो हाथियों पर कुंवर और युवराज, जबकि अन्य दो पर उनके रिश्तेदार सवार होते हैं।
रविवार की घटना के बाद सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा से हाथियों की संख्या पूछी गई तो उन्होंने पहले तीन हाथी होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों आजमगढ़ से आए थे। हालांकि, चार हाथियों के इस्तेमाल की बात सामने रखने पर उन्होंने स्वीकार किया और कहा कि एक हाथी बिहार के कैमूर जिले से भी मंगाया गया था। उनके अनुसार, उसे घटना से एक दिन पहले यानी 16 अक्तूबर को ही लौटा दिया गया था।
ये हैं नियम
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: हाथी अनुसूची-1 में शामिल है और उसे उच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। हाथियों के स्वामित्व, अधिग्रहण और स्थानांतरण से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है।
स्थानांतरण के नियम : हाथी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज, पशुचिकित्सकीय फिटनेस और संबंधित वन अधिकारियों की स्वीकृति की जरूरत हो सकती है।
सार्वजनिक आयोजन : हाथियों के इस्तेमाल, परिवहन और भीड़भाड़ वाले आयोजन में सुरक्षा के लिए संबंधित वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस से लागू अनुमतियों एवं शर्तों की पुष्टि जरूरी है।