फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Terai Farmers Fear Eviction Sikh Farmers Allege Agricultural Land Being Taken After Generations of Cultivation

यूपी: जमीन से बेदखल होने के भय में तराई के किसान, पीढ़ियों से खेती कर रहे सिखों का कृषि भूमि छीनने का आरोप

Mon, 21 Sep 2026 05:54 AM IST
Sharukh Khan तराई क्षेत्र से विनीत सक्सेना की रिपोर्ट
तराई क्षेत्र से विनीत सक्सेना की रिपोर्ट Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 21 Sep 2026 05:54 AM IST
सार

उत्तराखंड के खटीमा-मझोला से लखीमपुर खीरी (लखनऊ) बॉर्डर के बीच 7680 किमी में फैला तराई का करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र मिनी पंजाब कहलाता है। अकेले तराई के निघासन क्षेत्र में करीब 71 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है।  आजादी के बाद पाकिस्तान से उजड़े किसानों को तराई के घने जंगलों में बसाया गया। तब जंगली जानवरों और मलेरिया का आतंक था। हिम्मती सिखों ने इसे गन्ना,  धान, गेहूं, सरसों, केला और पिपरमेंट के बड़े उत्पादन क्षेत्र में तब्दील कर दिया।

विज्ञापन
Terai Farmers Fear Eviction Sikh Farmers Allege Agricultural Land Being Taken After Generations of Cultivation
किसानों का आरोप- आजादी के बाद पीढ़ियों से खेती कर रहे सिखों से कृषि भूमि छीनी जा रही - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तराखंड बॉर्डर से लखीमपुर खीरी तक फैले तराई के विशाल कृषि क्षेत्र में इन दिनों गहरी बेचैनी है। देश का बंटवारा, 84 के दंगे और आतंकवाद का दौर सह चुके किसानों को अब भूमिहीन होने का डर सता रहा है। उनका आरोप है कि वन विभाग खेतों के बीच अचानक अपनी जमीन बताकर खड़ी फसलों पर जेसीबी व ट्रैक्टर चला रहा है। उत्तराखंड से खीरी बॉर्डर तक सैकड़ों किसान आक्रोशित हैं। वहीं, वन विभाग इसे अतिक्रमण के खिलाफ कब्जामुक्ति अभियान बता रहा है।
विज्ञापन


‘अमर उजाला’ ने तराई क्षेत्र में जमीनी हाल जानने का प्रयास किया। गांव पस्तौर (उत्तराखंड-पीलीभीत बॉर्डर) के किसान जोगिंदर सिंह ने बताया कि जो किसान 1947 के बाद से काबिज हैं, उनके पास कागज व रजिस्ट्रियां भी हैं, फिर भी भूमि कब्जा की जा रही है। आजादी के बाद सरकार ने पाकिस्तान और पंजाब में छिनी जमीनों के बदले तराई के जंगलों में जमीनें दी थीं। 
विज्ञापन


उनका कहना है कि बुजुर्गों की चूक का फायदा उठाकर लेखपालों ने कागजों में मनमानी की। कब्जे हमारे थे, इसलिए कभी सोचा नहीं कि भूमि हमसे छीनी जाएगी। जंगलों, जानवरों और मच्छरों से जूझकर भूमि कृषि योग्य बनाने वाले किसानों से जमीन और रोटी छीनी जाएगी, तो विरोध तय है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कागज भी नहीं मानते, खड़ी फसलों पर चलाए ट्रैक्टर-जेसीबी
शाहजहांपुर के गांव नवदिया बंकी के अमृतपाल सिंह बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशान शाहजहांपुर के किसान हैं, जिनकी जमीनें जोतकर फसलें तबाह कर दी गईं। पक्ष जानने की कोशिश तक नहीं हुई। शाहजहांपुर के अमरजीत सिंह ने दिखाया कि पूरे कागज होने पर भी कोई मान नहीं रहा। बंडा, गहलोइया व उगनैलआई के किसान एकजुट हो रहे हैं।

 

जगत गांव (उत्तराखंड बॉर्डर) के अमरजीत सिंह का कहना है कि कांग्रेस शासन जैसी ज्यादतियां आज भी जारी हैं। बच्चों के लिए रोजगार न होने से खेती ही सहारा है और अब वह भी छीनी जा रही है।
 

सीएम योगी से भरोसा मिला अब न्याय का इंतजार
पीलीभीत के रिसोला फॉर्म के किसान हरजिंदर सिंह कहलो ने कहा कि आजादी के बाद से तराई के किसानों ने कई बार तबाही झेली। पूर्ववर्ती सरकारों में मनमानी के बाद सिख अब वन विभाग के कब्जों से परेशान हैं। सीएम योगी के आश्वासन पर भरोसा है कि वे सिखों को राहत दिलाएंगे।

 

सिस्टम की मनमानी अब और बर्दाश्त नहीं
उत्तराखंड बॉर्डर के सरदार कुलदीप सिंह भुल्लर ने बताया कि 55 एकड़ जमीन वन विभाग ने सरकारी बताकर जोत ली। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के आश्वासन के बावजूद सिस्टम की मनमानी जारी है। छोटे खेतों में भी वन विभाग अपने चक दर्शा रहा है। कोर्ट में मुकदमे लड़ रहे किसानों की जमीनें भी छीनी जा रही हैं। किसानों का कहना है कि मनमानी अब और बर्दाश्त नहीं होगी।
 

48 एकड़ पर वन विभाग का कब्जा, 50 किसान प्रभावित
शाहजहांपुर में बंडा थाना क्षेत्र के गांव फगुनहाई के किसान बलजीत सिंह का कहना है कि हमारे दादा करम सिंह, उनके भाई प्यारा सिंह और पूरन सिंह के नाम आजादी के बाद जमींदारी के समय 48 एकड़ के पट्टे हुए थे। 1971-72 में चकबंदी में हमारी जमीनें वन विभाग के नाम दर्ज कर दी गईं। केस कोर्ट में है। इस बीच वन विभाग ने 27 जुलाई को बिना नोटिस खेतों पर जेसीबी, ट्रैक्टर चलाकर फसल तबाह कर दी। करीब 25 किसान परिवारों पर एक्शन हुआ।

 

कोर्ट में केस, पर 48 एकड़ जमीन पर वन विभाग ने कर लिया कब्जा
शाहजहांपुर के बंडा स्थित गांव फगुनहाई के किसान बलजीत सिंह पर वन विभाग ने केस दर्ज कराया है। बलजीत ने बताया कि दादा करम सिंह, प्यारा सिंह व पूरन सिंह के नाम आजादी के बाद 48 एकड़ के पट्टे हुए थे। 1971-72 में चकबंदी के दौरान जमीनें वन विभाग के नाम दर्ज कर दी गईं। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद 27 जुलाई को बिना नोटिस जेसीबी चलाकर फसलें तबाह कर दी गईं। पुराने केस में स्टे ऑर्डर के बावजूद एफआईआर दर्ज कर दी। लखविंदर सिंह लक्खा, दीदार सिंह, रनजीत सिंह, बिट्टू, सतनाम सिंह, हरभजन सिंह व मंगल सिंह समेत करीब 25 किसान परिवारों पर कार्रवाई हुई है और सैकड़ों खतरे में हैं।
 

बिना नोटिस खड़ी फसलों पर चलाए ट्रैक्टर
शाहजहांपुर के गांव नवदिया बंकी और गहलोइया मजरे में 2-4 एकड़ खेती वाले करीब 53 परिवार परेशान हैं। नवदिया बंकी के गुरप्रीत सिंह ने बताया कि वन टीम ने अचानक पहुंचकर फसलों पर ट्रैक्टर चला दिए। प्रभावितों में करनैल सिंह, मनप्रीत सिंह, हरविंदर सिंह, रक्षपाल सिंह, मनजीत सिंह, गुरमुख सिंह, गुरमेज सिंह, राजवीर सिंह, दलविंदर सिंह, बलजीत सिंह, गुरदयाल सिंह व जसवंत सिंह समेत 20 से अधिक किसान शामिल हैं।

 

गहलोइया के करनैल सिंह ने बताया कि दादा नगीना सिंह व मीमल सिंह के नाम 1952 के बाद के पट्टे थे। 1971-72 की चकबंदी में जमीन जंगलात में दर्ज हो गई। कोर्ट में केस विचाराधीन होने के बाद भी अचानक पैमाइश कर 40 एकड़ जमीन पर तारबंदी कर दी गई।

 

वन मंत्री ने कहा, किसानों का हित जरूर देखेंगे
विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए सिख किसानों को तराई में जमीन आवंटित किए गए थे। उन्हें रियायतें भी दी गईं थीं। वन विभाग के कब्जामुक्ति अभियान में यदि पट्टे वाले किसान प्रभावित हो रहे हैं तो हम उनका हित जरूर देखेंगे।  हमारे पास ऐसी कोई शिकायत सीधे नहीं आई है। -डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री


 

तराई से आ रही शिकायतों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत करवाकर, अवश्य ही कारण स्पष्ट कराया जाएगा। उचित हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।
-सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उत्तर प्रदेश
    
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed