कानपुर: पाल्हेपुर रामलीला में जीवंत हुआ राम-भरत मिलाप, तापस वेश देख छलक पड़े आंसू, भावुक हुए दर्शक
Kanpur News: सरसौल विकास खंड के पाल्हेपुर गांव में 165 साल पुरानी ऐतिहासिक बीस दिवसीय रामलीला चल रही है। इसके तहत मंगलवार रात भरत मिलाप और चित्रकूट प्रसंग का अत्यंत भावुक मंचन किया गया। श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को तपस्वी वेश में देखकर भरत विह्वल हो उठे।
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कानपुर में सरसौल विकास खंड के पाल्हेपुर गांव में चल रही 165 वर्ष प्राचीन बीस दिवसीय रामलीला में मंगलवार रात चित्रकूट में श्रीराम और भरत मिलन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। राम, लक्ष्मण और सीता को तपस्वी वेश में पर्णकुटी में निवास करते देख भरत विह्वल हो उठे।
लीला में दिखाया गया कि चित्रकूट में प्रजाजनों के साथ पहुंचे भरत ने श्रीराम से अयोध्या वापस लौट चलने के लिए काफी मान-मनुहार की, लेकिन श्रीराम ने वनवास की मर्यादा का पालन करते हुए लौटने से मना कर दिया। उन्होंने भरत से कहा कि यह उनकी आज्ञा है कि उनके वापस लौटने तक अयोध्या की सत्ता का संचालन वही करें।
अंतिम निर्णय श्रीराम पर ही छोड़ दिया
श्रीराम के वचन सुनकर भरत की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी और वह भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वह जीते जी ऐसा नहीं कर सकते, सिंहासन पर आपका ही अधिकार है और आपके रहते वह कभी सिंहासन पर नहीं बैठेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अंतिम निर्णय श्रीराम पर ही छोड़ दिया।
जनक जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे
इसी दौरान मिथिला से राजा जनक के दूत चित्रकूट पहुंचे और राजा जनक व रानी सुनैना के आगमन का संदेश दिया। समाचार सुनकर श्रीराम, लक्ष्मण, सीता सहित भरत, शत्रुघ्न और अयोध्या से आए सभी प्रजाजन जनक जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे।