एएमयू सर सैयद डे: केपी एक्सीलेंस सेंटर बनेगा, जेन-जी को सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति मसीह ने दिया संदेश
एएमयू सर सैयद डे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह और भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला (केरल) के प्रधानाचार्य रियर एडमिरल एस. एम. उरूज अतहर, गुजरात के केपी समूह के संस्थापक अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ. फारुक जी. पटेल ने शिरकत की।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में केपी एक्सीलेंस सेंटर बनेगा। गुजरात के केपी ग्रुप के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक फारूक जी. पटेल ने सर सैयद डे पर सेंटर के लिए पांच करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लिए यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर केपी ग्रुप काम करेगा।
उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी का काफी नाम सुना था, लेकिन यहां आने का ख्वाब तक नहीं देखा था। यहां आकर काफी अच्छा लगा। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एएमयू के शताब्दी वर्षगांठ पर भाषण दिया था, जिसे सुनकर मेरे मन में आने की इच्छा जगी थी। उन्होंने कहा कि सेंटर का मकसद विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों, उद्योग की जरूरतों और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।
फारुक पटेल ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम है। एएमयू के साथ मिलकर उनका समूह युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए काम करेगा। प्रस्तावित केंद्र में नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
युवाओं की पहचान शोर से नहीं, उनके काम से होनी चाहिए : रियर एडमिरल अतहर
इंडियन नेवल एकेडमी, एझिमाला केरल के प्रिंसिपल रियर एडमिरल एसएम उरूज अतहर ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा शिकायतों में नहीं, समाज बदलने में लगनी चाहिए। उनकी पहचान ऊंची आवाज से नहीं, बल्कि उनके विचारों और काम से होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से नवाचार, रचनात्मकता और समाजसेवा के जरिये बदलाव की अगुवाई करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान ने शिक्षा को केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने, चरित्र गढ़ने और समाज का भविष्य संवारने का माध्यम माना था। एएमयू के कृषि वैज्ञानिक किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ खेती को बढ़ावा दें, प्रबंधन विशेषज्ञ स्थानीय उद्योगों को आधुनिक बनाने में सहयोग करें, चिकित्सा विशेषज्ञ आसपास के क्षेत्रों में निवारक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाएं और इंजीनियर स्थानीय समस्याओं के तकनीकी समाधान तलाशें।
छात्रसंघ चुनाव में गरिमा बनाएं रखें छात्र : कुलपति
कुलपति प्रो. नईमा खातून ने सर सैयद डे पर छात्रों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, बौद्धिक स्वतंत्रता और विनम्रता बनाए रखने का आग्रह किया। विद्यार्थियों को सामाजिक माध्यमों से परे सार्थक जीवन बनाने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
एएमयू समुदाय से बौद्धिक खुलेपन, वैज्ञानिक सोच और नैतिक जिम्मेदारी को साथ लेकर सर सैयद की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इससे पूर्व कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने स्वागत भाषण दिया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एम. अतहर अंसारी ने आभार जताया। संचालन डॉ. शारिक अकील और डॉ. फायजा अब्बासी ने किया। मंच पर पीवीसी प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान मौजूद रहे।
इन्होंने भी विचार व्यक्त किए
छात्रा आयशा जमाल, छात्र अबू दाऊद, प्रो. अजरा मूसवी और प्रो. मोहम्मद अली जौहर ने सर सैयद की विरासत और उनके शैक्षिक मिशन की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।
इन्हें मिला पुरस्कार
सर सैयद अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय, अमेरिका में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर प्रो. हुसैन नस्र को प्रदान किया गया, जबकि राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशनल सोसाइटी को उनके योगदान के लिए दिया गया।
एएमयू, डीयू और इलाहाबाद विवि के छात्र भी हुए पुरस्कृत
अखिल भारतीय सर सैयद निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। अंग्रेजी श्रेणी में एएमयू की मलीहा इकबाल पहले, दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेंस की छात्रा अपूर्वा दत्ता दूसरे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा राजश्री मिश्रा तीसरे स्थान पर रहीं।
हिंदी श्रेणी में एएमयू के वीमेंस कॉलेज की छात्रा सलवा फातिमा पहले, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के शोधार्थी मुशर्रफ परवेज दूसरे और एएमयू के वीमेंस पॉलिटेक्निक की सुभाना रिहान तीसरे स्थान पर रहीं। उर्दू श्रेणी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के छात्र मोहम्मद फैजुर रजा पहले, एएमयू में उर्दू के पीएचडी शोधार्थी मुनव्वर अली दूसरे और उर्दू के ही शोधार्थी सबी जी तीसरे स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता का विषय इक्कीसवीं सदी में प्रौद्योगिकी और नैतिकता: सर सैयद का दृष्टिकोण था।
सर सैयद की मजार पर हुई चादरपोशी
सर सैयड डे की शुरुआत सुबह छह बजे यूनिवर्सिटी की मस्जिद में कुरानख्वानी से हुई। इसके बाद सर सैयद अहमद खान की मजार पर चादरपोशी की गई। सुबह साढ़े नौ बजे सर सैयद हाउस में सर सैयद अकादमी की 10 पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें सर सैयद्स तफसीर-उल-कुरान के दो खंड, डॉ. असद फैसल फारूकी की सर सैयद की मुतालाती सवानेह, प्रो. अरशद मसूद हाशमी की अलीगढ़ कॉलेज और शीराज, प्रो. सारिका वार्ष्णेय की सर सैयद अहमद खान-चरितमय तहजीब-उल-अखलाक और फिक्र-ओ-नजर के विशेषांकय आतिफ सैयद की अलीगढ़: द सिटी दैट आउटलास्टेड एम्पायर्स। डॉ. शम्स बदांयूनी द्वारा संपादित मुतालए हयात-ए-जावेद के एक सौ पच्चीस साल, मजहर सईद की सर सैयद की कहानी, अशआर की जुबानी, डॉ. एम. फिरोज खान और डॉ. शगुफ्ता नियाज द्वारा संपादित सर सैयद अहमद खान और डॉ. राहत अबरार द्वारा संपादित सर सैयद: रवादारी और अमन के अलमबरदार शामिल हैं।
जेन-जी को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति का संदेश... खूब किताबें पढ़ें
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में सर सैयद दिवस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने देश के जेन-जी के लिए संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खूब किताबें पढ़ें और पढ़ाई पर फोकस रखें, तभी भविष्य सुधरेगा। उन्होंने बताया कि वह आज भी किताबें पढ़ते हैं। इससे न सिर्फ शब्दकोश बढ़ता है, बल्कि भाषा का विस्तार होता है।
कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि गांवों की दशा पर शोध होना चाहिए क्योंकि गांव में भारत बसता है। शनिवार को गुलिस्तान-ए-सैयद में यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 209वीं जयंती मनाई गई। समारोह में न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह बतौर मुख्य अतिथि और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
असफलताओं का सामना करना भी सीखें युवा : न्यायमूर्ति मसीह
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने सर सैयद के संघर्ष और दृढ़ संकल्प की तुलना आज के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों से की। विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल सफलता हासिल करना ही नहीं, बल्कि असफलताओं का सामना करना भी सीखना चाहिए। जीतने वालों को तालियां मिलती हैं, हारने वालों को जिंदगी मिलती है। सर सैयद ने विरोध को अवसर में बदला। साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ सामना करने पर असफलताएं भी उपलब्धि की सीढ़ियां बन सकती हैं। जो समुदाय पढ़ता और सोचता नहीं, वह प्रगति नहीं कर सकता।
उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री पर सतही निर्भरता के बजाय गंभीरता से पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाती हैं, अभिव्यक्ति को बेहतर बनाती हैं और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं। मिंटो सर्किल के पूर्व छात्र रहे न्यायमूर्ति मसीह ने कहा कि शेरवानी सिर्फ एक परिधान नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी की पहचान है।
गांव की बुराइयों को दूर करने के लिए कलम चलाएं : न्यायमूर्ति सत्यवीर
विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने कहा कि विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के आसपास के गांवों में जाएं और गरीबी, भेदभाव और गांव की बुराइयों को दूर करने के लिए कलम चलाएं। न्यायमूर्ति ने कहा कि ज्ञान और न्याय का वास्तविक महत्व तभी है जब वे उन लोगों तक पहुंचें जिनके लिए वे हैं। उन्होंने शिक्षा को गरीब और वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बताया।
महिला शिक्षा, वास्तविक समानता और सांविधानिक न्याय के महत्व पर जोर देते हुए एएमयू से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने एएमयू को ऐसा संस्थान बताया जहां ज्ञान जाति, धर्म और आर्थिक पृष्ठभूमि की बाधाओं से ऊपर उठता है। इस पर विद्यार्थियों का फोकस होना चाहिए कि विचारों को कैसे मजबूत रखें। उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि पुस्तकालय का स्वागतपूर्ण वातावरण, कर्मचारियों का सहयोग और विद्यार्थियों के बीच भाईचारे की भावना उनके मन पर अमिट छाप छोड़ गई।