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38-38 पदक, फिर भी बेटियां आगे: एशियाड में महिलाओं ने कैसे बढ़ाया भारत का मान? स्वर्ण में पुरुषों से रहीं आगे
Mon, 05 Oct 2026 09:28 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 05 Oct 2026 09:28 AM IST
सार
एशियाई खेल 2026 में भारत ने 21 स्वर्ण समेत 85 पदक जीते। इनमें महिला और पुरुष खिलाड़ियों के खाते में 38-38 पदक आए, लेकिन स्वर्ण के मामले में महिलाओं ने बाजी मारी। भारतीय महिलाओं ने 11 गोल्ड जीते, जबकि पुरुषों के खाते में सात स्वर्ण आए। तीरंदाजी, बॉक्सिंग, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी और एथलेटिक्स में महिलाओं ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।
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अनाहत, मीराबाई, चिनप्पा और नीरू
- फोटो : IANS
विस्तार
एशियाई खेल 2026 में भारत का अभियान 21 स्वर्ण समेत 85 पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारत भले ही पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका, लेकिन नागोया में एक खास कहानी जरूर लिखी गई। महिला और पुरुष खिलाड़ियों ने 38-38 पदक जीते, लेकिन सोने की चमक में भारतीय बेटियां पुरुषों से आगे निकल गईं।
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महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा।
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बाएं से- अंकिता, कीर्ति और कुमकुम
- फोटो : Twitter
महिलाओं के 38 पदकों में 11 स्वर्ण
| वर्ग | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल पदक |
|---|---|---|---|---|
| महिलाएं | 11 | 11 | 16 | 38 |
| पुरुष | 7 | 14 | 17 | 38 |
| मिश्रित | 3 | 2 | 4 | 9 |
| कुल | 21 | 27 | 37 | 85 |
आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।
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एशियन गेम्स 2026
- फोटो : पीटीआई
तीरंदाजी से हॉकी तक बेटियों का जलवा
भारतीय महिलाओं ने तीरंदाजी में तीन स्वर्ण जीते। कुमकुम मोहोद ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर एशियाई खेलों में इस स्पर्धा का भारत के लिए पहला स्वर्ण हासिल किया। उनकी टीम ने भी स्वर्ण जीता। गोल्फ में प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। यह एशियाई खेलों के व्यक्तिगत गोल्फ में किसी भारतीय महिला का पहला स्वर्ण था। बॉक्सिंग में परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। शूटिंग में नीरू ढांढा ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण के साथ अहम भूमिका निभाई।
भारतीय महिलाओं ने तीरंदाजी में तीन स्वर्ण जीते। कुमकुम मोहोद ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर एशियाई खेलों में इस स्पर्धा का भारत के लिए पहला स्वर्ण हासिल किया। उनकी टीम ने भी स्वर्ण जीता। गोल्फ में प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। यह एशियाई खेलों के व्यक्तिगत गोल्फ में किसी भारतीय महिला का पहला स्वर्ण था। बॉक्सिंग में परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। शूटिंग में नीरू ढांढा ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण के साथ अहम भूमिका निभाई।
अंकुश, लवलीना और परवीन
- फोटो : IANS/ANI
क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा
महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। एथलेटिक्स में भी महिलाओं ने भारत को स्वर्ण दिलाया। 4x400 मीटर रिले में विद्या रामराज, किरण पहल, एमआर पूवम्मा और प्राची चौधरी की टीम ने स्वर्ण जीता।
बराबर पदक, लेकिन असर बड़ा
भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान बरकरार रखा और इसमें महिला खिलाड़ियों के स्वर्ण पदकों का योगदान निर्णायक रहा। 38-38 पदकों की बराबरी के बावजूद 11 बनाम सात का स्वर्ण आंकड़ा बताता है कि नागोया में भारतीय महिलाओं ने सिर्फ पदक नहीं जीते, बल्कि सबसे चमकदार पदकों में बड़ी हिस्सेदारी निभाई।
महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। एथलेटिक्स में भी महिलाओं ने भारत को स्वर्ण दिलाया। 4x400 मीटर रिले में विद्या रामराज, किरण पहल, एमआर पूवम्मा और प्राची चौधरी की टीम ने स्वर्ण जीता।
बराबर पदक, लेकिन असर बड़ा
भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान बरकरार रखा और इसमें महिला खिलाड़ियों के स्वर्ण पदकों का योगदान निर्णायक रहा। 38-38 पदकों की बराबरी के बावजूद 11 बनाम सात का स्वर्ण आंकड़ा बताता है कि नागोया में भारतीय महिलाओं ने सिर्फ पदक नहीं जीते, बल्कि सबसे चमकदार पदकों में बड़ी हिस्सेदारी निभाई।