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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Politics: Jairam Thakur says there is no industrial policy in the state; 30,000 units face a crisis

राजनीति: जयराम ठाकुर बोले- प्रदेश में औद्योगिक नीति नहीं, 30 हजार इकाइयों पर संकट

Wed, 28 Oct 2026 07:28 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Oct 2026 07:28 PM IST
सार

जयराम ठाकुर ने कहा कि  हकीकत में राज्य में कोई औद्योगिक नीति ही अस्तित्व में नहीं है। इसके कारण प्रदेश की 30,000 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 

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Politics: Jairam Thakur says there is no industrial policy in the state; 30,000 units face a crisis
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री मंचों से आत्मनिर्भर और समृद्ध हिमाचल के खोखले दावे कर रहे हैं। हकीकत में राज्य में कोई औद्योगिक नीति ही अस्तित्व में नहीं है। इसके कारण प्रदेश की 30,000 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। औद्योगिक नीति गत वर्ष 31 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है और सरकार महज तीन बार इसकी अवधि बढ़ाकर काम चला रही है। बुधवार को जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार के पास न कोई नीति है, न प्राथमिकता और न ही कोई स्पष्ट विजन। उद्योग अब केवल सत्ता-संरक्षित लोगों की उगाही का जरिया बनकर रह गए हैं।

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मुख्यमंत्री अपने मित्रों के लिए मेरिट लिस्ट तक चोरी करने पर उतारू हैं। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठतम अधिकारी को सेवा विस्तार देने और विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को अकारण रद्द करने के मामलों में उच्च न्यायालय के फैसलों ने सरकार की तानाशाही और मनमानी को बेनकाब कर दिया है। पूर्व सीएम ने न्यायालय के फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि जनहित के नाम पर केवल मित्रहित साधा जा रहा है। संवैधानिक आयोगों और उच्च पदों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इसी तरह जल शक्ति विभाग के एक दागी अधिकारी को दिए गए सेवा विस्तार पर भी उच्च न्यायालय सख्त टिप्पणी कर चुका है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखने का आदेश दे चुका है। व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली सरकार में शुचिता पूरी तरह नदारद है।

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