फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal: Married daughter is her parents heir; land lease cannot be denied, petitioner gets justice from the

हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- शादीशुदा बेटी माता-पिता की वारिस, भूमि का पट्टा देने से इन्कार नहीं कर सकते

Thu, 17 Sep 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 17 Sep 2026 05:30 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता की मौत के बाद उनकी शादीशुदा बेटी को नौतोड़ जमीन का कानूनी पट्टा (कागजात) पाने का पूरा हक है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को उसके माता-पिता की कानूनी वारिस के रूप में नौतौड़ भूमि का पट्टा देने से वंचित नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन
Himachal: Married daughter is her parents heir; land lease cannot be denied, petitioner gets justice from the
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता की मौत के बाद उनकी शादीशुदा बेटी को नौतोड़ जमीन का कानूनी पट्टा (कागजात) पाने का पूरा हक है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को उसके माता-पिता की कानूनी वारिस के रूप में नौतौड़ भूमि का पट्टा देने से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने एडीएम शिमला का आदेश निरस्त करते हुए राज्य सरकार को दो महीने में याचिकाकर्ता को जमीन का पट्टा जारी करने का आदेश दिया है।

विज्ञापन

यह मामला शिमला जिले की चौपाल तहसील के नवनी गांव की रहने वाली शांति से जुड़ा है। वर्ष 1972 में शांति के पिता मीना राम को सरकार से नौतौड़ के तहत 3 बीघा 2 बिस्वा जमीन मंजूर हुई थी। उन्हें जमीन का कब्जा मिल गया और वे उस पर खेती भी करने लगे, लेकिन राजस्व अधिकारियों की लापरवाही के चलते जमीन का सरकारी पट्टा साइन नहीं हो सका। मीना राम के निधन के बाद उनकी पत्नी ने पट्टा जारी करने की अर्जी दी। पट्टा दोबारा तैयार हुआ पर अधिकारियों ने फिर दस्तखत नहीं किए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

2012 में मां के इंतकाल के बाद परिवार में अकेली वारिस शांति बची, जो उस जमीन पर लगातार खेती कर रही थी। वर्ष 2023 में शांति ने प्रशासन से गुहार लगाई कि जमीन का पट्टा उनके नाम किया जाए। एक जनवरी 2024 को एडीएम शिमला ने शांति का आवेदन यह कहकर रद्द कर दिया कि 1980 के एक सरकारी निर्देश के मुताबिक शादीशुदा बेटियों को नौतौड़ जमीन का पट्टा नहीं दिया जा सकता। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
 

विज्ञापन

वर्ष 1980 का पत्र केवल स्पष्टीकरण था : कोर्ट
पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1980 का पत्र केवल एक प्रशासनिक स्पष्टीकरण था। हिमाचल प्रदेश नौतौड़ लैंड रूल्स, 1968 में ऐसा कोई नियम नहीं है जो विवाहित बेटी को कानूनी वारिस के रूप में भूमि का दावा करने से रोकता हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed