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प्रकृति से खिलवाड़ मंजूर नहीं: जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय सख्त

Mon, 02 Nov 2026 10:06 AM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Mon, 02 Nov 2026 10:06 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर की पृथ्वीराज नगर योजना में प्राकृतिक जल स्रोतों, जल निकासी मार्गों और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने अधिकारियों को राजस्व रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेजों की जांच के साथ मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करने को कहा है।

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Tampering with nature will not be tolerated: Rajasthan High Court takes strict stance on conservation of water
राजस्थान उच्च न्यायालय

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर की पृथ्वीराज नगर योजना में प्राकृतिक जल स्रोतों, जल निकासी मार्गों और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सुनवाई के समय स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जा सकती।
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वास्तविक स्थिति जांचने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने वर्ष 2012 में कमलेश मेहरात की ओर से दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राजस्व रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेज का गहराई से परीक्षण करें। पीठ ने कहा कि अधिकारी मौके पर जाकर भूमि की वास्तविक स्थिति का पता लगाएं। इसके साथ ही वे यह जांचें कि प्रस्तावित विकास योजना से प्राकृतिक जल प्रवाह तथा जल भंडारण व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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स्वस्थ पर्यावरण जीवन का अधिकार
अदालत ने कहा कि किसी विकास योजना में नदी, नाले, तालाब अथवा जलग्रहण क्षेत्र के रूप में दर्ज भूमि को शामिल कर लेने मात्र से उसके प्राकृतिक स्वरूप को बदलने का अधिकार नहीं मिल जाता। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पूर्व संबंधित कानूनों और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विचार करना अत्यंत अनिवार्य है।

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पीठ ने टिप्पणी की कि स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। राज्य सरकार इन सार्वजनिक संसाधनों की न्यासी है और सामुदायिक हित में इनका संरक्षण करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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