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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lucknow: Legal issues arise again over Kukrail Night Safari, demand for a fresh plan; know the full story

लखनऊ: कुकरैल नाइट सफारी पर फिर कानूनी पेंच, नए सिरे से योजना बनाने की उठी मांग; जानिए पूरा मामला

Mon, 21 Sep 2026 08:58 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 21 Sep 2026 08:58 PM IST
सार

Kukrail Night Safari: मूल योजना में चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाना, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन शामिल था। सीईसी ने इन तीनों हिस्सों को खारिज कर दिया था।
 

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Lucknow: Legal issues arise again over Kukrail Night Safari, demand for a fresh plan; know the full story
कुकरैल नाइट सफारी का प्रस्तावित मॉडल।

विस्तार

 कुकरैल में प्रस्तावित नाइट सफारी की योजना एक बार फिर कानूनी सवालों के घेरे में आ गई है। राजधानी के पर्यावरणविद् आलोक सिंह ने इसके खिलाफ केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि पहले जिस बड़े प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी ली गई थी, उसमें चिड़ियाघर, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन भी शामिल थे। ये तीनों हिस्से अब हट चुके हैं। ऐसे में अब सिर्फ बची नाइट सफारी को उसी पुराने प्रोजेक्ट का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा। नाइट सफारी को पुराने प्रोजेक्ट की मंजूरियों के सहारे आगे बढ़ाने के बजाय नई योजना बनाकर नए सिरे से जरूरी मंजूरियां ली जानी चाहिए।
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पुरानी योजना के तीन बड़े हिस्से हुए थे खारिज
मूल योजना में चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाना, चार लेन की सड़क और एडवेंचर जोन शामिल था। सीईसी ने इन तीनों हिस्सों को खारिज कर दिया था। राज्य सरकार ने भी इन फैसलों को स्वीकार किया है। 15 जुलाई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इसका उल्लेख है।आलोक सिंह के मुताबिक अब बची नाइट सफारी का अलग से कभी आकलन नहीं हुआ।
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एक ही योजना में था चिड़ियाघर और नाइट सफारी
मूल योजना 390.75 एकड़ में थी। इसमें 181.85 एकड़ नाइट सफारी और 208.9 एकड़ चिड़ियाघर के लिए था। योजना में पशु चिकित्सा केंद्र, प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों के आवास और रसोई जैसी साझा सुविधाएं भी रखी गई थीं। चिड़ियाघर और सड़क हटने के बाद पूरी योजना का स्वरूप ही बदल गया है।
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3510 करोड़ की मंजूरी में सड़क का खर्च भी था शामिल
अधिवक्ता आलोक सिंक के मुताबिक पूरे प्रोजेक्ट के लिए 3510.57 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी मिली थी। इसमें खारिज हो चुकी सड़क के लिए 364.06 करोड़ रुपये भी शामिल थे। 855.07 एकड़ जमीन के आवंटन का भी प्रावधान था। सिंह का कहना है कि अब प्रोजेक्ट बदल चुका है, इसलिए कितनी जमीन चाहिए और कितना पैसा लगेगा, इसका नए सिरे से हिसाब होना चाहिए।

रिजर्व फारेस्ट में नाइट सफारी के नियम भी जांचे जाएं
सिंह ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 2025 की नाइट सफारी गाइडलाइन का हवाला दिया है। उनका कहना है कि वन भूमि का इस्तेमाल करने वाली नाइट सफारी को मंजूरी देने पर इसमें रोक है। कुकरैल 1950 से अधिसूचित रिजर्व फारेस्ट है। उन्होंने पर्यावरण मंजूरी के लिए जमा फार्म-1 और फार्म-1ए में दी गई जानकारियों में भी अंतर बताया है।


नई मंजूरी तक रोका जाए निर्माण और पेड़ कटान
आलोक सिंह ने सीईसी से व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की है। साथ ही कहा है कि नई मंजूरियां और सुरक्षा उपाय पूरे होने तक टेंडर, निर्माण और पेड़ कटान न किया जाए। उन्होंने पूरे कुकरैल वन क्षेत्र की दोबारा वैज्ञानिक पैमाइश और पेड़ों की जियो-टैगिंग कराने की भी मांग की है।


 
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