आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: संधान और जगदीश व्योम की कविता- वक्त का आखेटक

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- संधान, जिसका अर्थ है- निशाना लगाना, खोज। प्रस्तुत है जगदीश व्योम की कविता- रात की मुट्ठी
                                                                 
                            

वक्त का आखेटक
घूम रहा है
शर संधान किए
लगाए है टकटकी
कि हम
करें तनिक-सा प्रमाद
और, वह
दबोच ले हमें
तहस-नहस कर दे
हमारे मिथ्याभिमान को
पर
आएगा सतत नैराश्य ही
उसके हिस्से में
क्योंकि
हमने पहचान ली है
उसकी पग-ध्वनि
दूर हो गया है
हमसे
हमारा तंद्रिल व्यामोह
हमने पढ़ लिए हैं
समय के पंखों पर उभरे
पुलकित अक्षर
जिसमें लिखा है कि-
आओ!
हम सब मिल कर
खोलें !
रात की मुठ्ठी को
जिसमें कैद है
समूचा सूरज !!

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।


लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o 

5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर