"दर्द देने वाले का पछतावा"
वक्त के साथ सहा हुआ दर्द भूल जाता है,
पर दिया हुआ दर्द पछतावा बन जाता है।
यह पछतावा सबसे गहरी चोट होती है,
खुद से भागने की कोशिश भी व्यर्थ होती है।
अगर तेरी वजह से किसी की आँख में आँसू है,
किसी का भरोसा टूटा है, किसी की खामोशी है,
तो वो यादें बार-बार लौटकर आएंगी,
तेरे दिल को हर पल कचोटकर जाएंगी।
सामने वाला माफ कर दे, ये मुमकिन है,
पर खुद को माफ करना सबसे कठिन है।
चोट सहने वाला शायद आगे बढ़ जाए,
पर देने वाले का ज़मीर उसे लौट-लौट याद दिलाए।
इसलिए संभलकर कदम उठाओ, किसी का दिल न दुखाओ,
जो रिश्ते भरोसे से बने हैं, उन्हें पछतावे से न गिराओ।
-- जगदीश प्रसाद शर्मा
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