काम कितना कठिन हो
चाहे जैसा भी दिन हो
होना नहीं हमें हीन है
होना नहीं हमें मलीन है
घबराना नहीं है हमें
हड़बड़ाना नहीं है हमें
बड़बड़ाना नहीं है हमें
शांति से सोच विचार
कर करो कर्म हजार
करो कर्म से प्यार
आएंगी बाधाएं हजार
जाएंगी बाधाएं हजार
मिलेगा श्रम का उपहार
खिलेगा हर पुष्प बार बार
होगा श्रम का सत्कार
होगा भाग्य का चमत्कार
बस कर्म करो,यार!
निरंतर लगातार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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