दुनिया में पाता नहीं, कभी मान सम्मान
नीयत का खोटा अगर, ढुलमुल हो ईमान
अजब गजब से आजकल,सत्ता खेले खेल
देशभक्त जो अस्ल हैं, भेजे उनको जेल
भूखे को खाना खिला, करना है सम्मान
हिन्दू मुस्लिम बाद में , पहले है इंसान
अश्क आँख में ला रहे, शायर के अश्आर
डायस यूँ बनने लगा, इमोशनल दरबार
कथनी करनी है अलग, सदा खेलते खेल
सत्ता जाते ही सभी, जायेंगे ये जेल
-हमीद कानपुरी
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