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रूसी तेल पर प्रतिबंध हटेगा या नहीं: ट्रंप अगले 10 दिन में लेंगे फैसला, अमेरिकी राजदूत गोर ने क्या दिया संकेत?

Thu, 15 Oct 2026 11:47 AM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 15 Oct 2026 11:47 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अगले 10 दिनों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंधों को लेकर फैसला ले सकते हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, भारत को राहत मिलेगी या नहीं, यह फैसला ट्रंप करेंगे।

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Will ban on Russian oil lifted or not Trump decide within next 10 days what hint US Ambassador Gore provide
सर्जियो गोर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आगामी भारत दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े प्रावधानों पर फैसला कर सकते हैं। ऐसे में भारत की नजर जहां एक ओर अमेरिकी निवेश और व्यापार समझौते पर है, वहीं दूसरी ओर रूसी ऊर्जा आयात को लेकर वॉशिंगटन के रुख पर भी रहेगी। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 15 अक्टूबर को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी कार्यक्रम में दोनों मुद्दों पर अहम बातें कहीं।

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कारोबार पर रहेगा रुबियो के भारत दौरे का जोर
सर्जियो गोर के मुताबिक, मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच उज्बेकिस्तान और भारत के दौरे पर रहेंगे। भारत में वह मुंबई और जामनगर जाएंगे। मुंबई में उनकी मुलाकात कारोबारी प्रतिनिधियों और भारतीय सरकारी अधिकारियों से होगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में उनसे मिलने की उम्मीद है। इसके बाद रुबियो जामनगर में रिलायंस के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस दौरे का मकसद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करना और ऊर्जा सहयोग की संभावनाएं तलाशना है।
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रक्षा से लेकर चिप निर्माण तक साझेदारी बढ़ाने की तैयारी
गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा उत्पादन, सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और माइक्रोन जैसी कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। उनके मुताबिक, यह सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि भारत में निवेश से अमेरिकी कंपनियों को नए अवसर मिलते हैं और अमेरिका में भी रोजगार पैदा होने की संभावना बढ़ती है।
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रूसी तेल पर ट्रंप के फैसले से भारत की बढ़ सकती है चिंता
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भी गोर ने अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप को अगले करीब 10 दिनों में इस मामले पर फैसला करना है। अमेरिकी कांग्रेस ने ऐसे देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को देने वाला कानून पारित किया है, जो रूसी ऊर्जा खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करते हैं। हालांकि, गोर ने साफ किया कि इस कदम का मकसद किसी देश को सजा देना नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। भारत को किसी तरह की छूट मिलेगी या नहीं, यह फैसला भी ट्रंप को ही करना है। गोर ने यह भी कहा कि अमेरिका समझता है कि कोई देश अचानक अपनी ऊर्जा आपूर्ति बंद नहीं कर सकता।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी उम्मीद
गोर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने की उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, बातचीत में बड़े मुद्दों और समझौते की व्यापक रूपरेखा पर काफी प्रगति हो चुकी है। हालांकि, कुछ छोटे मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है। उन्होंने बताया कि बातचीत करीब डेढ़ साल से चल रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पहले की व्यापार व्यवस्था के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करना पड़ा है। इसके बावजूद अमेरिका भारत के साथ आर्थिक रिश्ते आगे बढ़ाना चाहता है।


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एआई और रक्षा सहयोग में भारत पर अमेरिका का भरोसा
गोर ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के विकास के लिए अहम साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीक विकसित करने से दोनों देशों को फायदा होगा। भारत को अमेरिका की ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शुरुआती 10 देशों में शामिल किए जाने को भी उन्होंने आपसी भरोसे का संकेत बताया। इसके अलावा, पिछले सप्ताह भारत में अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों की संयुक्त सैन्य अभ्यास में मौजूदगी का जिक्र करते हुए गोर ने रक्षा सहयोग को दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की मिसाल बताया।

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