फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Saurav Das Citizenship Under Scrutiny Madras High Court Seeks Centre Response What Petitioner Allegations

सौरव दास की नागरिकता की होगी जांच?: मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब, याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाए?

Fri, 30 Oct 2026 04:58 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 30 Oct 2026 04:58 PM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट ने पत्रकार और सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास की पहचान और राष्ट्रीयता की जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में पासपोर्ट और आधार रद्द करने के साथ एक्स और इंस्टाग्राम खाते बंद कराने की मांग भी है। आखिर याचिकाकर्ता ने दास की नागरिकता पर सवाल क्यों उठाए? न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर क्या आरोप हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Saurav Das Citizenship Under Scrutiny Madras High Court Seeks Centre Response What  Petitioner Allegations
सोशल मीडिया खातों को लेकर क्या कार्रवाई हो सकती है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास की पहचान और राष्ट्रीयता की जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, सौरव दास और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में दास की नागरिकता और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच कराने के साथ ही उनके सोशल मीडिया खातों को बंद करने की मांग भी की गई है। मामला अब अदालत में विचाराधीन है।

विज्ञापन


क्या है पूरा मामला और अदालत ने क्या आदेश दिया?
मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने सौरव दास, केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए उनका जवाब मांगा है। अदालत ने मामले को छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। यानी अब संबंधित पक्षों को याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों पर अपना पक्ष रखना होगा। यह याचिका तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के रहने वाले गणेश कुमार ने दायर की है। इसका शीर्षक गणेश कुमार बनाम क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी है। याचिकाकर्ता ने अदालत से दास की पहचान, राष्ट्रीयता और उनके पारिवारिक इतिहास की जांच कराने की मांग की है।
विज्ञापन


याचिका में सौरव दास की पहचान और परिवार को लेकर क्या मांग की गई?
गणेश कुमार ने अपनी याचिका में सौरव दास की पहचान और पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। इसमें उनके माता-पिता से जुड़ी जानकारी की जांच करने की बात भी कही गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अधिकारियों को दास की नागरिकता और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए। याचिका में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने दास के पासपोर्ट से जुड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों से भी उनकी पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत विवरण की जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, दास की राष्ट्रीयता को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल याचिका का हिस्सा हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में सौरव दास पर सार्वजनिक मंचों पर न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ हैं। सुनवाई के दौरान गणेश कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता बी. जगन्नाथ ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहले संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उन्हें जनहित याचिका दाखिल करनी पड़ी। वकील ने अदालत में कहा कि न्यायपालिका के बारे में जिस तरह से बातें कही जा रही हैं, वह सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को शिकायत दी थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

पासपोर्ट, आधार और सोशल मीडिया खातों को लेकर क्या कार्रवाई हो सकती है?
याचिका में कई तरह की कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि सौरव दास भारतीय नागरिक नहीं हैं और विदेशी नागरिक हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द किया जाए। इसके साथ ही केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को उनके एक्स और इंस्टाग्राम खातों को बंद करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि दास को न्यायपालिका के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां करने से रोका जाए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता बी. जगन्नाथ ने याचिका के साथ लगाए गए दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। इन दस्तावेजों में दास की पहचान और पते से जुड़ी जानकारी होने की बात कही गई। पीठ ने दस्तावेजों को देखा और उनमें दर्ज विवरण को लेकर वकील से स्पष्टीकरण भी मांगा।


अब आगे क्या होगा और क्या अदालत ने आरोपों को सही माना है?
फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट ने केवल याचिका पर नोटिस जारी किया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने न तो सौरव दास की नागरिकता पर कोई फैसला सुनाया है और न ही उनके पासपोर्ट, आधार कार्ड या सोशल मीडिया खातों को बंद करने का आदेश दिया है। इन सभी मांगों पर आगे की सुनवाई में विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार, सौरव दास और अन्य प्रतिवादियों के जवाब आने के बाद मामला फिर अदालत के सामने आएगा। ऐसे में इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जांच और कार्रवाई की मांग पर संबंधित पक्ष क्या जवाब देते हैं। यह भी स्पष्ट है कि राष्ट्रीयता और न्यायपालिका पर टिप्पणियों से जुड़े आरोप अभी याचिका में लगाए गए दावे हैं, उन्हें अदालत की ओर से प्रमाणित तथ्य नहीं माना गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed