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'भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य उज्ज्वल': चीन-पाकिस्तान पर पूर्व अमरीकी एनएसए का बड़ा बयान, जानें और क्या कहा
Fri, 18 Sep 2026 08:53 PM IST
अमन तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 18 Sep 2026 08:53 PM IST
सार
अमेरिका के पूर्व एनएसए एचआर मैकमास्टर ने भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को मजबूत बताया है। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और चीन को लेकर समान चिंताओं को रिश्तों की प्रमुख ताकत बताया। मैकमास्टर ने कहा कि अमेरिका को रूस या ब्रिक्स को लेकर भारत पर दबाव नहीं बनाना चाहिए।
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लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के संबंधों का दीर्घकालिक भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, आर्थिक हित और चीन को लेकर एक जैसी चिंताएं दोनों देशों को हमेशा करीब रखेंगी। पिछले तीन दशकों में दोनों देशों के रिश्ते लगातार बेहतर हुए हैं, हालांकि बीते दो वर्षों में कुछ तनाव जरूर दिखा है।
एक समाचार एजेंसी से बातचीत में मैकमास्टर ने कहा कि भारत को अमेरिका पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को रूस के खिलाफ जाने या ब्रिक्स जैसे मंचों से अलग होने के लिए भारत पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्र बाजार अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक शासन प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना चाहिए, जिसका प्रतिनिधित्व अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान करते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में एनएसए रहे मैकमास्टर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों का सबसे बड़ा आधार चीन को लेकर दोनों देशों की साझी सोच है। उन्होंने कहा कि चीन एक विरोधी देश है। वह भारत और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ बराबरी का नहीं, बल्कि गुलामी जैसा रिश्ता चाहता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बीजिंग और वाशिंगटन के बीच नहीं, बल्कि गुलामी और संप्रभुता के बीच का है। अमेरिका हमेशा संप्रभुता के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।
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मैकमास्टर ने भारत की युवा आबादी, विशाल आकार और आर्थिक संभावनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर भारत सफल होता है, तो पूरी दुनिया सफल होगी। उन्होंने खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर बड़े वैश्विक प्रयास करने की बात कही। उनका मानना है कि जो बाजार समाधान भारत में कारगर साबित होंगे, वे पूरी दुनिया के लिए भी काम करेंगे।
ये भी पढ़ें: राहुल के पार्टी तोड़ने के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: रिजिजू ने कांग्रेस को कहा भस्मासुर, याद दिलाया इतिहास
पाकिस्तान के विषय पर मैकमास्टर ने अपनी पुरानी निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और आतंकी संगठनों को उसके समर्थन को खुलकर स्वीकार करने में हिचकिचाता रहा। पाकिस्तान ने खुद एक आतंकी व्यवस्था खड़ी की, जिसका नुकसान वह आज खुद झेल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जल्द खत्म नहीं होने वाला, और यह बात भारत तथा अमेरिका को और करीब लाएगी।
मैकमास्टर ने स्वीकार किया कि दोनों देशों की अलग-अलग उम्मीदों से रिश्ते कभी-कभी जटिल हो जाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार और बराबरी के लेन-देन (रेसिप्रोसिटी) पर बहुत जोर देते हैं, जिससे मतभेद उभरते हैं। इसके साथ ही भारत के मन में भी 'छोड़ दिए जाने का डर' और 'अनावश्यक विवादों में उलझने का डर' रहता है।
उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता धैर्य और आपसी विश्वास पर निर्भर है। उन्होंने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय को दोनों देशों को जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु बताया। मैकमास्टर ने कहा कि आने वाले समय में कुछ रुकावटें जरूर आ सकती हैं, लेकिन साझा मूल्य दोनों देशों को हमेशा बांधकर रखेंगे।
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एक समाचार एजेंसी से बातचीत में मैकमास्टर ने कहा कि भारत को अमेरिका पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को रूस के खिलाफ जाने या ब्रिक्स जैसे मंचों से अलग होने के लिए भारत पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्र बाजार अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक शासन प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना चाहिए, जिसका प्रतिनिधित्व अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान करते हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में एनएसए रहे मैकमास्टर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों का सबसे बड़ा आधार चीन को लेकर दोनों देशों की साझी सोच है। उन्होंने कहा कि चीन एक विरोधी देश है। वह भारत और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ बराबरी का नहीं, बल्कि गुलामी जैसा रिश्ता चाहता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बीजिंग और वाशिंगटन के बीच नहीं, बल्कि गुलामी और संप्रभुता के बीच का है। अमेरिका हमेशा संप्रभुता के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।
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मैकमास्टर ने भारत की युवा आबादी, विशाल आकार और आर्थिक संभावनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर भारत सफल होता है, तो पूरी दुनिया सफल होगी। उन्होंने खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर बड़े वैश्विक प्रयास करने की बात कही। उनका मानना है कि जो बाजार समाधान भारत में कारगर साबित होंगे, वे पूरी दुनिया के लिए भी काम करेंगे।
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पाकिस्तान के विषय पर मैकमास्टर ने अपनी पुरानी निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और आतंकी संगठनों को उसके समर्थन को खुलकर स्वीकार करने में हिचकिचाता रहा। पाकिस्तान ने खुद एक आतंकी व्यवस्था खड़ी की, जिसका नुकसान वह आज खुद झेल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जल्द खत्म नहीं होने वाला, और यह बात भारत तथा अमेरिका को और करीब लाएगी।
मैकमास्टर ने स्वीकार किया कि दोनों देशों की अलग-अलग उम्मीदों से रिश्ते कभी-कभी जटिल हो जाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार और बराबरी के लेन-देन (रेसिप्रोसिटी) पर बहुत जोर देते हैं, जिससे मतभेद उभरते हैं। इसके साथ ही भारत के मन में भी 'छोड़ दिए जाने का डर' और 'अनावश्यक विवादों में उलझने का डर' रहता है।
उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता धैर्य और आपसी विश्वास पर निर्भर है। उन्होंने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय को दोनों देशों को जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु बताया। मैकमास्टर ने कहा कि आने वाले समय में कुछ रुकावटें जरूर आ सकती हैं, लेकिन साझा मूल्य दोनों देशों को हमेशा बांधकर रखेंगे।