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Jind News: कन्या पूजन कर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से मांगा आशीर्वाद
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19जेएनडी18: जयंती देवी मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: पुजारी
जींद। शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर सोमवार सुबह घरों से लेकर मंदिरों तक कन्या पूजन हुआ। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर पूजा-अर्चना की और अन्न ग्रहण कर व्रत खोला।
कई श्रद्धालु कन्याओं की तलाश में एक गली से दूसरी गली तक घूमते नजर आए। वहीं कुछ लोगों ने मंदिरों में आयोजित सामूहिक भोज में कन्या पूजन कर परंपरा निभाई।
नवरात्र के समापन पर सुबह से ही घरों में कन्या पूजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराया और उन्हें उपहार व दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत का पारण अधूरा रहता है।
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इसी आस्था के चलते श्रद्धालु सुबह से ही कन्याओं को भोजन कराने के लिए प्रयासरत रहे। कुछ कन्याओं ने एक ही सुबह कई घरों में भोजन किया। शहर के विभिन्न मंदिरों में भी सामूहिक कन्या भोज आयोजित किए गए, जहां श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर पूजा संपन्न की। इसके बाद व्रत रखने वाले लोगों ने अन्न ग्रहण किया।
जयंती देवी मंदिर में हवन, मां महागौरी की आराधना
ऐतिहासिक जयंती देवी मंदिर में अष्टमी के अवसर पर हवन-पूजन किया गया। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें शांति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाअष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन कन्याओं को भोजन, उपहार और दक्षिणा देकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डालकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।
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कई श्रद्धालु कन्याओं की तलाश में एक गली से दूसरी गली तक घूमते नजर आए। वहीं कुछ लोगों ने मंदिरों में आयोजित सामूहिक भोज में कन्या पूजन कर परंपरा निभाई।
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नवरात्र के समापन पर सुबह से ही घरों में कन्या पूजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराया और उन्हें उपहार व दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत का पारण अधूरा रहता है।
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इसी आस्था के चलते श्रद्धालु सुबह से ही कन्याओं को भोजन कराने के लिए प्रयासरत रहे। कुछ कन्याओं ने एक ही सुबह कई घरों में भोजन किया। शहर के विभिन्न मंदिरों में भी सामूहिक कन्या भोज आयोजित किए गए, जहां श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर पूजा संपन्न की। इसके बाद व्रत रखने वाले लोगों ने अन्न ग्रहण किया।
जयंती देवी मंदिर में हवन, मां महागौरी की आराधना
ऐतिहासिक जयंती देवी मंदिर में अष्टमी के अवसर पर हवन-पूजन किया गया। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें शांति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाअष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन कन्याओं को भोजन, उपहार और दक्षिणा देकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डालकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।

19जेएनडी18: जयंती देवी मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: पुजारी