{"_id":"6aa2da5b8bce5d3b8500a604","slug":"preparations-for-ganesh-utsav-are-in-full-swing-with-colourful-idols-of-bappa-adorning-the-markets-delhi-ncr-news-c-503-1-del1005-797-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: गणेश उत्सव की तैयारी तेज, बाजारों में सजीं बप्पा की रंग-बिरंगी प्रतिमाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: गणेश उत्सव की तैयारी तेज, बाजारों में सजीं बप्पा की रंग-बिरंगी प्रतिमाएं
विज्ञापन
- कोलकत्ता, महाराष्ट्र और गुजरात से मंगाई मिट्टी से तैयार हो रहीं ईको-फ्रेंडली मूर्तियां
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। कृष्ण जन्मोत्सव के बाद अब पूर्वी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में गणेश उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। दुर्गापुरी, गोकलपुरी, शाहदरा, खजूरी और कड़कड़ी मोड़ समेत कई क्षेत्रों के बाजारों में गणेश जी की प्रतिमाओं की बिक्री शुरू हो गई है। बप्पा के आगमन में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में घरों में प्रतिमा स्थापित करने वाले श्रद्धालु दुकानदारों को ऑर्डर देने लगे हैं।
छोटी मूर्तियों की बढ़ी मांग
दुकानदारों ने घरों में स्थापित की जाने वाली छोटी प्रतिमाओं का पर्याप्त स्टॉक तैयार किया है। दुर्गापुरी के दुकानदार श्याम ने बताया कि घरों में गणेश जी की स्थापना करने वाले अधिकांश लोग आगमन से दो-तीन दिन पहले ही प्रतिमा खरीदते हैं। इसलिए दुकानदार अंतिम समय के लिए छोटी मूर्तियां बचाकर रखते हैं।
बाजार में इस बार विभिन्न आकार और डिजाइन की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। दुकानदारों के अनुसार, कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिमाओं की कीमत एक हजार रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये और उससे अधिक तक है। बाजार में मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाएं भी उपलब्ध हैं। दुकानदारों के मुताबिक मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में जल्दी घुल जाती हैं, जबकि पीओपी की प्रतिमाओं को घुलने में अधिक समय लगता है। इस बार केदारनाथ धाम और नंदी महाराज पर विराजमान गणेश जी की प्रतिमाएं भी आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
विज्ञापन
इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी
लोनी रोड के मूर्ति विक्रेताओं के मुताबिक महाराष्ट्र और कोलकाता से मिट्टी मंगाकर प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्ति विक्रेता निखिल ने बताया कि इस बार इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। प्राकृतिक मिट्टी से बनी इन प्रतिमाओं में हल्दी, कुमकुम, चंदन और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पानी में विसर्जित करने पर ये अपेक्षाकृत जल्दी मिट्टी में मिल जाती हैं। रंग-बिरंगे कपड़ों और आकर्षक सजावट से सजी ये प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रही हैं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। कृष्ण जन्मोत्सव के बाद अब पूर्वी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में गणेश उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। दुर्गापुरी, गोकलपुरी, शाहदरा, खजूरी और कड़कड़ी मोड़ समेत कई क्षेत्रों के बाजारों में गणेश जी की प्रतिमाओं की बिक्री शुरू हो गई है। बप्पा के आगमन में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में घरों में प्रतिमा स्थापित करने वाले श्रद्धालु दुकानदारों को ऑर्डर देने लगे हैं।
छोटी मूर्तियों की बढ़ी मांग
दुकानदारों ने घरों में स्थापित की जाने वाली छोटी प्रतिमाओं का पर्याप्त स्टॉक तैयार किया है। दुर्गापुरी के दुकानदार श्याम ने बताया कि घरों में गणेश जी की स्थापना करने वाले अधिकांश लोग आगमन से दो-तीन दिन पहले ही प्रतिमा खरीदते हैं। इसलिए दुकानदार अंतिम समय के लिए छोटी मूर्तियां बचाकर रखते हैं।
विज्ञापन
बाजार में इस बार विभिन्न आकार और डिजाइन की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। दुकानदारों के अनुसार, कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिमाओं की कीमत एक हजार रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये और उससे अधिक तक है। बाजार में मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाएं भी उपलब्ध हैं। दुकानदारों के मुताबिक मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में जल्दी घुल जाती हैं, जबकि पीओपी की प्रतिमाओं को घुलने में अधिक समय लगता है। इस बार केदारनाथ धाम और नंदी महाराज पर विराजमान गणेश जी की प्रतिमाएं भी आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
विज्ञापन
इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी
लोनी रोड के मूर्ति विक्रेताओं के मुताबिक महाराष्ट्र और कोलकाता से मिट्टी मंगाकर प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्ति विक्रेता निखिल ने बताया कि इस बार इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। प्राकृतिक मिट्टी से बनी इन प्रतिमाओं में हल्दी, कुमकुम, चंदन और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पानी में विसर्जित करने पर ये अपेक्षाकृत जल्दी मिट्टी में मिल जाती हैं। रंग-बिरंगे कपड़ों और आकर्षक सजावट से सजी ये प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रही हैं।