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पोक्सो पीड़िता को जज का भावुक पत्र: 'बेटा, जिसे तुम अंकल कहती थी, वह आजाद नहीं घूमेगा; सबसे बहादुर छोटी लड़की'

Tue, 29 Sep 2026 12:27 PM IST
Vijay Singh Pundir गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 29 Sep 2026 12:27 PM IST
सार

ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने 20 मई के फैसले में पीड़िता को संबोधित करते हुए लिखा, 'बेटा, इस अदालत ने तुम्हें सुना। आज इस अदालत ने आदेश दिया है कि जिस आदमी को तुम ‘अंकल’ कहती थी, वह फिर कभी आजाद नहीं घूमेगा। तुम इस अदालत द्वारा देखी गई सबसे बहादुर छोटी लड़की हो।'

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Judge's emotional letter to a POCSO victim
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पोक्सो अधिनियम के एक मामले में ट्रायल कोर्ट की जज ने पीड़िता को ‘बेटा’ कहकर भावुक पत्र लिखा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पत्र को ‘प्रोत्साहन का संदेश’ करार दिया है और इसे मुआवजे के साथ पीड़िता तक पहुंचाने का आदेश दिया है।

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ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने 20 मई के फैसले में पीड़िता को संबोधित करते हुए लिखा, “बेटा, इस अदालत ने तुम्हें सुना… आज इस अदालत ने आदेश दिया है कि जिस आदमी को तुम ‘अंकल’ कहती थी, वह फिर कभी आजाद नहीं घूमेगा… तुम इस अदालत द्वारा देखी गई सबसे बहादुर छोटी लड़की हो। तुम अदालत में आईं, जिसने तुम्हें नुकसान पहुंचाया उसे इशारे से बताया और सच बोला… अब बेटा, अपनी जिंदगी जियो। स्कूल जाओ, दोस्त बनाओ। हंसो। खेलो। सपने देखो। यह अदालत तुम्हारी हिम्मत हमेशा याद रखेगी।”
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मामला 23 जुलाई 2023 का है, जिसमें सात वर्षीय बच्ची (अब लगभग 10 वर्ष) के साथ एग्रेवेटेड पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट का आरोप लगा था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था।
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दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने 29 सितंबर मंगलवार को दोषी की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने फॉरेंसिक समेत सबूतों को देखते हुए सजा निलंबन से इनकार किया और अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 तय की। हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को निर्देश दिया कि ट्रायल जज का यह भावुक पत्र और मुआवजा दो सप्ताह के भीतर पीड़िता या उसके परिवार को सौंप दिया जाए। कोर्ट ने पत्र को पीड़िता के लिए प्रोत्साहन का संदेश बताया।

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